दिन के कारोबार के दौरान बाजार में घबराहट वाली बिकवाली देखने को मिली. निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए कई शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए. बाजार बंद होने तक गिरावट का असर इतना गहरा रहा कि निवेशकों की करीब 9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई.
दिनभर बाजार का हाल
कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच 9 मार्च को शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 700 अंक तक लुढ़क गया था. कारोबार के दौरान यह 23,697 के इंट्राडे लो तक फिसल गया. हालांकि दिन के बाद के सत्र में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद बाजार पूरी तरह संभल नहीं पाया. अंत में निफ्टी 422 अंक की गिरावट के साथ 24,028 के स्तर पर बंद हुआ. पिछले तीन हफ्तों में निफ्टी अपने हालिया स्विंग हाई से करीब 2,000 अंक गिर चुका है.
टेक्निकल करेक्शन के करीब बाजार
लगातार गिरावट के कारण निफ्टी अब टेक्निकल करेक्शन के करीब पहुंच गया है. टेक्निकल करेक्शन का मतलब होता है हाल के उच्च स्तर से करीब 10 प्रतिशत की गिरावट. निफ्टी ने 5 जनवरी 2026 को अपना रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ था. उसके बाद से बाजार में धीरे धीरे दबाव बढ़ता गया और अब सूचकांक उस स्तर से काफी नीचे आ चुका है.
किन शेयरों में रही तेजी और गिरावट
निफ्टी के शेयरों में कुछ चुनिंदा कंपनियों में ही तेजी देखने को मिली. विप्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई. वहीं दूसरी ओर टाटा मोटर्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और मारुति सुजुकी इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली और ये प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे.
ज्यादातर सेक्टर दबाव में
सेक्टोरल स्तर पर देखें तो लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट का दबाव नजर आया. निफ्टी आईटी ही एकमात्र सेक्टर रहा जो हरे निशान में बंद हुआ. इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी मेटल जैसे सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.
ब्रॉडर मार्केट भी कमजोर
बाजार की कमजोरी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली. हालांकि दोनों इंडेक्स अपने इंट्राडे लो से करीब 1.5 प्रतिशत तक उछले, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी मिडकैप 100 करीब 1.97 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए.
बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज तेजी भारतीय बाजार के लिए बड़ा दबाव बनकर उभरी है. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण सोमवार को तेल की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी आई और यह 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया.
भारत जैसे देश के लिए यह खास तौर पर नकारात्मक है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है.
वैश्विक बाजारों में कमजोरी
भू राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में भी दबाव देखने को मिला. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज से जुड़े फ्यूचर्स करीब 489 अंक तक गिर गए.
इससे पहले इनमें 1,000 अंक से ज्यादा की गिरावट भी देखी गई थी. एसएंडपी 500 फ्यूचर्स करीब 0.9 प्रतिशत और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स करीब 1 प्रतिशत तक फिसल गए.
अमेरिकी डॉलर की मजबूती
मजबूत अमेरिकी डॉलर ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया. यूएस डॉलर इंडेक्स करीब 100 के आसपास बना हुआ है, जबकि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग रिकॉर्ड निचले स्तर 92.34 के करीब पहुंच गया है. आमतौर पर मजबूत डॉलर मेटल जैसे सेक्टरों पर दबाव डालता है और आयातित महंगाई का खतरा भी बढ़ाता है.
निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय
HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक बाजार का स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बना हुआ है. सोमवार को इंडेक्स ने करीब 23,700 के पास नया लो बनाया है. उनके अनुसार शॉर्ट टर्म में निफ्टी 24,200 से 24,300 के दायरे तक पुलबैक कर सकता है. हालांकि इस स्तर पर दोबारा बिकवाली देखने को मिल सकती है और इसे बढ़त पर बिकवाली का मौका माना जा सकता है.
कब आ सकती है रिकवरी
Bajaj Broking के विश्लेषकों का कहना है कि अगर निफ्टी 23,700 के सपोर्ट लेवल के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है तो आने वाले सत्रों में इसमें 24,400 से 24,500 तक की रिकवरी देखने को मिल सकती है. हालांकि अगर यह स्तर टूटता है तो गिरावट और तेज हो सकती है और निफ्टी 23,400 से 23,200 के दायरे तक फिसल सकता है.
23,850 के नीचे टूटा तो बढ़ सकती है गिरावट
SBI Securities के सुदीप के मुताबिक 23,880 से 23,850 का जोन फिलहाल बाजार के लिए अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है. अगर निफ्टी 23,850 के नीचे मजबूती से टूटता है तो बाजार में नई बिकवाली शुरू हो सकती है और इंडेक्स 23,700 तक गिर सकता है. वहीं ऊपर की ओर 24,130 से 24,150 का दायरा फिलहाल तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम करेगा. इस रेंज के ऊपर ब्रेकआउट मिलने पर ही बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है.
शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी कमजोर
इस बीच HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि निफ्टी का शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी भी साफ तौर पर मंदी वाला बना हुआ है. उनके अनुसार निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो बाजार की कमजोरी को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि सोमवार का इंट्राडे लो 23,697 फिलहाल तत्काल सपोर्ट के रूप में काम करेगा, जबकि किसी भी राहत वाली तेजी को 24,300 से 24,400 के दायरे में मजबूत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है.
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