दिसंबर तिमाही के डेटा से स्पष्ट है कि विदेशी निवेशक अब ‘वैल्यू’ और ‘फ्यूचर ग्रोथ’ की तलाश में हैं. रिन्यूएबल एनर्जी और कंज्यूमर टेक को भविष्य के सेक्टर माने जा रहे हैं, इसलिए वहां निवेश बढ़ रहा है. वहीं, डिफेंस और कंजम्पशन के ऊंचे वैल्यूएशन वाले शेयरों से एफपीआई ने मुनाफावसूली की.
BSE 500 कंपनियों के शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में FPIs ने चुनिंदा कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 700 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ाई है .92 कंपनियों के डेटा से पता चला है कि 38 कंपनियों में ही एफपीआई ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई या बरकरार रखी. जहां विदेशी निवेशकों ने न्यू-एज टेक और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर अपना भरोसा जताया है, वहीं डिफेंस और कंजम्पशन सेक्टर के कुछ दिग्गजों से उन्होंने दूरी बनाई है.
इन शेयरों में बढाई हिस्सेदारी
दिसंबर तिमाही के दौरान विदेशी निवेशकों का सबसे ज्यादा आकर्षण ‘न्यू-एज’ कंपनियों और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में देखा गया. हाल ही में लिस्ट हुई फूड डिलीवरी दिग्गज स्विगी में FPIs की हिस्सेदारी सितंबर के 12.23% से बढ़कर दिसंबर में 16.07% हो गई है. यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों को भारत के क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाएं दिख रही हैं.
ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ते भारत के कदम ने निवेशकों को उत्साहित किया है. सुजलॉन एनर्जी में विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 102 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 22.84% कर दी है. वहीं, वारी एनर्जीज़ में भी उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 6.91% हो गई है. AWL एग्री बिजनेस में विदेशी निवेशकों ने अपनी भागीदारी 704 बेसिस प्वाइंट बढाई. वहीं, RBL बैंक में भी FPI हिस्सेदारी 15.49% से छलांग लगाकर 21.91% तक पहुंच गई है. केनरा बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र जैसे सरकारी बैंकों के शेयर भी एफपीआई ने दिसंबर तिमाही में खरीदे.
इन कंपनियों के शेयर बेचे
एक तरफ जहां कुछ शेयर खरीदे जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कुछ ‘मार्केट डार्लिंग्स’ से निवेशकों ने मुनाफावसूली की. डिफेंस और बेवरेज सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों में FPIs ने कम से कम 100 बेसिस प्वाइंट तक हिस्सेदारी घटाई है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) डिफेंस सेक्टर का दिग्गज है. इस हेवीवेट शेयर से विदेशी निवेशकों ने यहां से अपना निवेश कुछ कम किया है. पेप्सिको की बॉटलर कंपनी VBL, जिसने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, वहां भी FPI हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है.
इनके अलावा कोलगेट-पामोलिव, CAMS और हैवेल्स इंडिया जैसी कंपनियों में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अपनी होल्डिंग 100 से 225 बेसिस प्वाइंट के बीच कम की है. फाइव-स्टार बिजनेस फाइनेंस में भी 285 बेसिस प्वाइंट की बड़ी कटौती देखी गई.
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