इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में दोबारा से पैदा हो रही व्यापारिक चिंताएं रहीं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की बात कही. उन्होंने कहा कि 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा. अगर समझौता नहीं हुआ तो 1 जून से यह शुल्क 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. इस बयान से वैश्विक बाजारों में डर फैल गया और उसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा.
आने वाले दिनों में दिखेगा भारी उतार-चढ़ाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा, “आने वाले कुछ समय में वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम बाजार को प्रभावित करेंगे. यह अभी साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक विकास पर क्या असर डालेंगी. अगर वाकई 10 प्रतिशत टैरिफ फरवरी से और फिर जून से 25 प्रतिशत लागू हुआ, तो यूरोप की ओर से जवाबी कदम लगभग तय हैं, जिससे ट्रेड वॉर की स्थिति बन सकती है और बाजार पर नकारात्मक असर पड़ेगा. हालांकि, पहले भी ऐसा हुआ है कि ट्रंप अपने फैसले से पीछे हटे हैं.”
बाजार के सेंटीमेंट को एक और झटका तब लगा, जब फेड चेयर को लेकर अनिश्चितता बढ़ी. ट्रंप ने संकेत दिया कि केविन हैसेट शायद अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयर न बनें और वे व्हाइट हाउस की नेशनल इकॉनमिक काउंसिल में ही बने रह सकते हैं. केविन हैसेट को ब्याज दरों में नरमी के समर्थक माना जाता है. उनके पद को लेकर असमंजस से 2026 में आक्रामक दर कटौती की उम्मीदें कुछ कमजोर हुईं, जिससे वैश्विक निवेशक सतर्क हो गए.
गिरावट के अन्य कारण
डर का मीटर हाई: इसी बीच इंडिया वीआईएक्स यानी अस्थिरता सूचकांक में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और यह करीब 11.98 तक पहुंच गया. इसका मतलब यह है कि निवेशक आने वाले दिनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका कर रहे हैं और जोखिम लेने से बच रहे हैं.
FIIs की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया. लगातार नौवें सत्र में एफआईआई ने शेयर बेचे और एक ही दिन में लगभग 4,346 करोड़ रुपये की निकासी हुई. डॉ. विजयकुमार ने बताया, “16 जनवरी तक जनवरी महीने में एफआईआई की कुल बिकवाली करीब 22,529 करोड़ रुपये रही. इस महीने सिर्फ एक दिन को छोड़कर हर दिन एफआईआई विक्रेता रहे हैं. 2026 की शुरुआत में भी भारत का प्रदर्शन अन्य बड़े बाजारों के मुकाबले कमजोर बना हुआ है.”
कमजोरी तिमाही नतीजे
कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने भी बाजार की धारणा बिगाड़ी. आईटी सेक्टर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जिसमें विप्रो सबसे ज्यादा फिसला और उसके शेयर लगभग 7.2 प्रतिशत टूट गए. कंपनी ने मार्च तिमाही के लिए उम्मीद से कम राजस्व वृद्धि का अनुमान दिया है, क्योंकि दिसंबर तिमाही में नए सौदों की बुकिंग छह तिमाहियों के निचले स्तर पर रही.
मेहता इक्विटीज के रिसर्च सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत तपसे ने रॉयटर्स से कहा, “बड़ी कंपनियों के मिले-जुले नतीजों ने बाजार को सतर्क बनाए रखा है. एक तरफ मंदड़ियों का दबाव है और दूसरी ओर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी, जिससे बाजार रस्साकशी की स्थिति में फंसा हुआ है.”
आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी तिमाही नतीजों के बाद करीब 3 प्रतिशत टूटे. रिपोर्ट के मुताबिक बैंक ने खराब कर्ज के लिए ज्यादा प्रावधान किए, जिससे निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ा.
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