कुल मिलाकर देखें तो दिसंबर महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से कुल ₹66,590.70 करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ है. इसका सीधा असर इंडस्ट्री के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर पड़ा है. नवंबर के ₹80,80,369.52 करोड़ के मुकाबले दिसंबर में कुल AUM 0.7% घटकर ₹80,23,378.99 करोड़ रह गया है. यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक फिलहाल बाजार से पैसा निकालने या नई खरीदारी से बचने की मुद्रा में हैं.
क्या यह खतरे की घंटी है?
दिसंबर 2025 के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली बात ‘SIP स्टॉपेज रेशियो’ है. यह अनुपात करीब 85 फीसदी तक पहुंच गया है. इसका सरल अर्थ यह है कि दिसंबर महीने में जितनी नई SIP शुरू की गईं, उनके मुकाबले 85 प्रतिशत पुरानी SIP या तो बंद कर दी गईं, या उन्हें बीच में ही रोक दिया गया.
अक्टूबर 2025 को छोड़ दिया जाए तो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पिछले 6 महीनों के सबसे निचले स्तर पर है. जब स्टॉपेज रेशियो इतना ऊंचा होता है, तो यह बाजार में अस्थिरता या निवेशकों के बीच घबराहट का संकेत देता है. सवाल यह उठता है कि आखिर वह कौन से कारक हैं जो निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों से पीछे हटने पर मजबूर कर रहे हैं?
क्यों बदं हो रही हैं SIP?
बाजार विशेषज्ञों ने इन आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया है और इसके पीछे 5 प्रमुख कारण बताए हैं. पहला कारण है SIP अवधि का पूरा होना. अक्सर आंकड़ों को देखकर लगता है कि लोग डर कर भाग रहे हैं, लेकिन AMFI का डेटा एक तकनीकी कारण भी बताता है. बड़ी संख्या में निवेशकों ने 3, 5 या 7 साल की अवधि के लिए SIP शुरू की थी. दिसंबर 2025 में बहुत सारी पुरानी SIP अपनी मैच्योरिटी यानी तय अवधि पर पहुंच गईं. जैसे ही अवधि पूरी होती है, SIP ऑटोमैटिक बंद हो जाती है. कई निवेशक इसे मैन्युअली दोबारा शुरू नहीं करते, जिससे स्टॉपेज के आंकड़े अचानक बढ़े हुए दिखाई देते हैं.
बाजार की अस्थिरता और नकारात्मक रिटर्न का डर
पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव का दौर देखा है. सेंसेक्स और निफ्टी में बार-बार आने वाली गिरावट ने नए निवेशकों को डरा दिया है. खासकर वे लोग जिन्होंने 2023-24 के बुल रन में निवेश शुरू किया था, वे अब अपने पोर्टफोलियो को लाल निशान (Negative Return) में देख रहे हैं. धैर्य की कमी के कारण ये निवेशक घबराकर अपनी SIP रोक रहे हैं, ताकि आगे और नुकसान न हो.
शार्ट टर्म लाभ की उम्मीद
सोशल मीडिया के दौर में कई लोग म्यूचुअल फंड को ‘क्विक मनी’ स्कीम समझकर निवेश करने लगे थे. SIP का सिद्धांत ‘कंपाउंडिंग’ पर आधारित है, जिसका लाभ कम से कम 5-10 साल में दिखता है. लेकिन जिन निवेशकों ने 6 महीने या 1 साल में ही बड़े रिटर्न की उम्मीद पाल ली थी, उन्हें निराशा हाथ लगी. उम्मीद के मुताबिक मुनाफा न मिलने पर उन्होंने SIP को एक “बेकार” विकल्प मानकर बंद करना ही बेहतर समझा.
मार्केट टाइमिंग की गलत रणनीति
कुछ निवेशक खुद को बहुत चतुर समझते हैं और बाजार को ‘टाइम’ करने की कोशिश करते हैं. उन्हें लगता है कि जब बाजार बहुत ऊपर (Overvalued) है, तो SIP रोक देनी चाहिए और जब बाजार गिरेगा, तब पैसा लगाना चाहिए. हालांकि, इतिहास गवाह है कि मार्केट टाइमिंग के चक्कर में निवेशक अक्सर गिरावट का लाभ नहीं उठा पाते और अनुशासन टूटने से उनका लॉन्ग टर्म फंड नहीं बन पाता.
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