यह सब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से शुरू हुआ. सोमवार को बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 2743 अंक गिर गया, लेकिन बाद में थोड़ा संभला और 1048 अंक नीचे बंद हुआ. इसमें 1.29 फीसदी की गिरावट आई. निफ्टी भी तेजी से गिरा और 24850 के करीब बंद हुआ. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 6 लाख 59 हजार 978 करोड़ रुपये घट गया. यह सब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों और वहां से जवाबी कार्रवाई से हुआ. निवेशक डर गए और सुरक्षित एसेट्स की तरफ भागे.
क्या जल्द खत्म होगा इजराइल और ईरान के बीच युद्ध?
ट्रंप ने कहा कि यह संघर्ष चार हफ्ते का प्रोसेस रहा है और यह चार हफ्ते या उससे कम समय तक चल सकता है. उन्होंने ईरान से बातचीत के लिए तैयार होने की बात भी कही, लेकिन कब बात होगी, यह साफ नहीं किया. इससे बाजार में और अनिश्चितता बढ़ गई है. अगर युद्ध लंबा खिंचा तो तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है, जो भारत जैसे देश के लिए बड़ी समस्या है क्योंकि हमारा ज्यादातर तेल आयात मिडिल ईस्ट से आता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय शेयरों में तेज गिरावट आई क्योंकि वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट फैल गया. बाजार ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों और इलाके में जवाबी हमलों पर रिएक्ट किया, जिससे लोग सुरक्षित निवेश की तरफ भागे. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जो तेल सप्लाई में बाधा की चिंता दिखाता है. इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है, सरकारी बजट पर दबाव पड़ेगा और एनर्जी व केमिकल सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन घटेंगे. इंडिया वीआईएक्स भी ऊपर चढ़ा है, जो ज्यादा अनिश्चितता और रिस्क दिखाता है. विदेशी संस्थागत निवेशक भी तेल की तेजी के बाद ज्यादा बिकवाली कर रहे हैं.
तकनीकी रूप से बाजार कमजोर है, लेकिन ओवरसोल्ड जोन में है. कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान ने कहा कि बाजार शॉर्ट और मीडियम टर्म एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है और इंट्राडे चार्ट्स में कमजोर फॉर्मेशन है, जो निगेटिव है. लेकिन बाजार ओवरसोल्ड लग रहा है, इसलिए तकनीकी बाउंस की संभावना है. निफ्टी के लिए 24750 और सेंसेक्स के लिए 80000 सपोर्ट लेवल हैं. अगर बाजार इनके ऊपर रहा तो पुलबैक जारी रह सकता है. ऊपर की तरफ निफ्टी 25000-25075 तक जा सकता है. लेकिन अगर 24750 टूटा तो 24650-24500 तक गिरावट आ सकती है.
थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के फाउंडर गौरव उदानी ने कहा कि निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 25100 के आसपास है और सपोर्ट 24550-24600 रेंज में. अगर यह सपोर्ट टूटा तो नीचे और दबाव बढ़ेगा, जबकि रेजिस्टेंस पार करने पर थोड़ी स्थिरता आएगी. जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए और लीवरेज्ड पोजीशन से बचना चाहिए.
बुधवार को किन फैक्टर्स पर रखें नजर?
बुधवार की ट्रेडिंग में सबसे बड़ा फैक्टर तेल होगा. अगर कच्चा तेल लगातार बढ़ा तो महंगाई की उम्मीदें बढ़ेंगी, रुपया और कमजोर होगा और ब्याज दरों का आउटलुक जटिल हो जाएगा. अगर तेल स्थिर रहा या थोड़ा नीचे आया तो बाजार ओवरसोल्ड लेवल से रिलीफ बाउंस कर सकता है. मंगलवार को तेल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई क्योंकि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लड़ाई तेज हो गई. यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 70.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले सेशन की 14 फीसदी तेजी के बाद था.
एसएंडपी 500 में टॉप गेनर्स में नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन 6.02 फीसदी ऊपर 768.02 पर, मैराथन पेट्रोलियम 5.86 फीसदी ऊपर 209.82 पर, पलांटिर टेक्नोलॉजीज 5.82 फीसदी ऊपर 145.17 पर, एक्सॉन एंटरप्राइज 5.46 फीसदी ऊपर 572.02 पर थे. टॉप लूजर्स में एईएस 17.77 फीसदी नीचे 14.21 पर, नॉर्वेजियन क्रूज लाइन 10.53 फीसदी नीचे 22.18 पर, एस्टे लॉडर 8.48 फीसदी नीचे 100.19 पर, एलेवेंस हेल्थ 8.10 फीसदी नीचे 294.07 पर थे. यह सब भारतीय निवेशकों के लिए चिंता की बात है क्योंकि हमारा बाजार वैश्विक घटनाओं से प्रभावित होता हुआ नजर आया है. अगर युद्ध जल्दी खत्म नहीं हुआ तो तेल महंगा रहेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा.
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