फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (FMP) एक क्लोज-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड है जिसमें निवेश की अवधि पहले से तय होती है, जैसे 1, 3 या 5 साल, और फंड लॉन्च होने के बाद नई निवेश की अनुमति नहीं रहती. फंड मैनेजर इसका पैसा सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड और ट्रेजरी बिल जैसे सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाता है, जिससे जोखिम कम और रिटर्न अनुमानित रहता है. यह उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प है जो कम जोखिम में FD से बेहतर रिटर्न और टैक्स बचत चाहते हैं, हालांकि इसमें लिक्विडिटी सीमित रहती है और रिटर्न गारंटीड नहीं होता.
फंड मैनेजर पैसा सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड, ट्रेजरी बिल और डिबेंचर्स जैसे सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाता है. इससे ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है और रिटर्न की रेंज पहले से अनुमान लगाई जा सकती है. हालांकि रिटर्न गारंटीड नहीं होता लेकिन FD से बेहतर मिलने की संभावना रहती है.
फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान में निवेश के फायदे
FMP का सबसे बड़ा फायदा हैं कि जोखिम बहुत कम रहता है. शेयर बाजार की तरह ऊपर-नीचे नहीं होता. रिटर्न प्रेडिक्टेबल होता है क्योंकि मैच्योरिटी वाली इन्वेस्टमेंट्स में पैसा लगाया जाता है. अगर आप 3 साल से ज्यादा समय के लिए निवेश करते हैं तो इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है. मतलब महंगाई के हिसाब से लागत बढ़ जाती है और टैक्स कम देना पड़ता है. ज्यादातर FMP में एंट्री या एग्जिट लोड नहीं लगता. बाजार में जब अनिश्चितता होती है तो यह FD से बेहतर विकल्प बन जाता है क्योंकि टैक्स में बचत ज्यादा होती है. लो रिस्क वाले लोग जो FD जैसा सुरक्षित निवेश चाहते हैं लेकिन बेहतर रिटर्न और टैक्स फायदा भी चाहिए उन्हें FMP सूट करता है.
FMP में निवेश करने पर होता है रिस्क?
FMP में कुछ नुकसान भी हैं. मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना आसान नहीं होता. लिक्विडिटी कम रहती है और पैसा पूरी अवधि तक लॉक रहता है. अगर कोई बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी डिफॉल्ट कर जाए तो थोड़ा नुकसान हो सकता है हालांकि क्रेडिट रिस्क कम रखने की कोशिश की जाती है. मैच्योरिटी के बाद दोबारा निवेश करने पर वही रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती. SIP के जरिए FMP में निवेश नहीं किया जा सकता क्योंकि यह क्लोज-एंडेड होता है. SIP हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाने का तरीका है जबकि FMP में एकमुश्त रकम लगानी पड़ती है. अगर आप SIP करना चाहते हैं तो ओपन-एंडेड डेट फंड चुन सकते हैं.
कैसे करें निवेश?
AMC जब नया FMP लॉन्च करती है तो तय समय में एकमुश्त पैसा लगाना होता है. आप डायरेक्ट प्लान या रेगुलर प्लान चुन सकते हैं. टैक्सेशन में अगर 3 साल से कम हो तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से लगता है. 3 साल से ज्यादा पर इंडेक्सेशन के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20 फीसदी लगता है. FD में पूरा रिटर्न आपकी स्लैब रेट पर टैक्स लगता है इसलिए लॉन्ग टर्म में FMP ज्यादा फायदेमंद रहता है.
FMP उन लोगों के लिए अच्छा है जो कम जोखिम में FD से बेहतर रिटर्न और टैक्स बचत चाहते हैं. लेकिन लिक्विडिटी की जरूरत हो तो FD या लिक्विड फंड बेहतर हो सकता है. निवेश से पहले अपनी जरूरत और समय देख लें. रिटर्न अनुमानित होता है लेकिन डेट फंड होने से स्थिर रहता है. कई निवेशक इसे FD का स्मार्ट अपग्रेड मानते हैं क्योंकि टैक्स एफिशिएंसी ज्यादा होती है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.