अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में शिपिंग रूट्स बाधित हो गए हैं. इसका सीधा असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर पड़ा है. करीब 4 लाख मीट्रिक टन चावल बंदरगाहों और ट्रांजिट में फंसा हुआ है और नए एक्सपोर्ट ऑर्डर लगभग ठप हो गए हैं.
इसका सीधा असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर पड़ा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रीमियम बासमती चावल निर्यातक है और इसके खरीदारों में सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं. मिडिल ईस्ट भारत के कुल बासमती निर्यात का आधे से ज्यादा हिस्सा खरीदता है. ऑल इंडिया राइस एक्पोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल के मुताबिक करीब 2 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में फंसा हुआ है, जबकि लगभग 2 लाख टन भारतीय बंदरगाहों पर अटका है. युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के शिपिंग रूट्स बाधित हो गए हैं और कंटेनर फ्रेट लागत दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है.
माल भेजना हुआ मुश्किल
निर्यातकों ने पहले ही अपना स्टॉक बंदरगाहों तक पहुंचा दिया था, लेकिन अब ऊंची ढुलाई लागत और अनिश्चित हालात के कारण माल भेजना मुश्किल हो गया है. वैकल्पिक बाजार भी इतनी बड़ी मात्रा को तुरंत नहीं खपा सकते. इस बीच निर्यातक नई बुकिंग लेने से बच रहे हैं और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
दिल्ली स्थित एक वैश्विक ट्रेडिंग हाउस के डीलर के अनुसार अगर हालात लंबे समय तक बने रहे तो कुछ निर्यातक फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा ले सकते हैं. दोनों पक्ष यानी खरीदार और विक्रेता मान रहे हैं कि यह अभूतपूर्व स्थिति है.
फोर्स मेज्योर क्लॉज क्या है?
फोर्स मेज्योर किसी कानूनी अनुबंध या एग्रीमेंट में शामिल वह क्लॉज होता है जो युद्ध, महामारी, प्राकृतिक आपदा (जैसे भूकंप या बाढ़) या किसी भी ऐसी अनपेक्षित घटना की स्थिति में लागू होता है जो किसी व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर हो. जब ऐसी कोई बड़ी घटना घटती है, तो यह क्लॉज अनुबंध के पक्षों को उनकी कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने से अस्थायी या स्थायी रूप से छूट दे देता है, यानी अगर कंपनी समय पर काम पूरा नहीं कर पाती या सप्लाई नहीं दे पाती, तो उसे इसके लिए अपराधी या जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
बासमती की रिकॉर्ड पैदावार
यह संकट ऐसे समय आया है जब भारत में इस साल बासमती की रिकॉर्ड पैदावार हुई है. अचानक मांग घटने से कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है. भारत और पाकिस्तान ही ऐसे देश हैं जहां बासमती की यह लंबी किस्म बड़े पैमाने पर उगाई जाती है और बिरयानी व पुलाव जैसे व्यंजनों में इसका खास इस्तेमाल होता है. मुंबई के एक ट्रेडर के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय सप्लाई का कोई वास्तविक विकल्प नहीं है. उनका मानना है कि जैसे ही युद्ध की स्थिति खत्म होगी, ये देश फिर से बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर देंगे.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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