नेताजी ने आजादी के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी. इसी के तहत 2 जुलाई 1940 को नेताजी ने कोलकाता में हॉलवेल स्मारक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया. यह स्मारक जलियांवाला बाग हत्याकांड के अपराधी जनरल डायर के सम्मान में बनाया गय था. नेताजी ने इसे तोड़ने का आह्वान चलाया. ब्रिटिश सरकार ने भारतीय रक्षा कानून धारा 129 के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया और प्रेसीडेंसी जेल में डाल दिया गया.
नेताजी जेल में जाते ही आमरण अनशन शुरू कर दिया. उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. ब्रिटिश सरकार घबरा गई. 5 दिसंबर 1940 को स्वास्थ्य के आधार पर रिहा कर दिया गया. शर्त रखी कि स्वस्थ होते ही दोबारा गिरफ्तार किए जाएंगे. नेताजी को कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित घर में नजरबंद कर दिया गया. घर के बाहर 24 घंटे सशस्त्र पहरा तैनात रहा. जिससे वो घर से बाहर कदम न रख पाएं.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर यानी 2021 में इस ट्रेन का नाम ‘नेताजी एक्सप्रेस’ रखा गया.
किस रेलवे स्टेशन से हुए थे सवार
साल 1941 में नेताजी को ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता (तब कलकत्ता) में नजरबंद कर रखा था. आजादी की लड़ाई में प्रमुख भूमिका नेता जी की थी. अंग्रेज़ उन्हें बड़ा खतरा मान रहे थे. लेकिन 16 जनवरी की रात नेताजी ने प्लाना बनाया, जिसे अंग्रेज हुकूमत समझ नही पायी. उन्होंने पठान का वेशभूषा बनाई. घर से निकले , बाहर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें पहचान नहीं पाए. ब्रिटिश हुकूमत की सख्त निगरानी में भी वेश बदलकर (पठान के भेष में) निकल पड़े. 18 जनवरी को ड्राइवर के सााथ झारखंड के गोमो जंक्शन पहुंचे.
कौन सी ट्रेन में हुए थे सवार
नेता जी गोमो स्टेशन पहुंच गए और वहां पर कालका मेल का इंतजार करने लगे. कालका मेल (ट्रेन नंबर 12311/12312) उस समय हावड़ा से कालका (शिमला के लिए) जाने वाली प्रमुख ट्रेन थी. नेताजी गोमो स्टेशन से इस ट्रेन में चढ़े. फर्स्ट क्लास के एक कंपार्टमेंट में नेताजी सवार हो गए. भीड़भाड़, सुरक्षाकर्मियों की जांच से बचते बचाते दिल्ली पहुंचे.
कैसे किया आगे का सफर
नेताजी पेशावर होते अफगानिस्तान के काबुल पहुंचे. वहां से जर्मन दूतावास से वीजा लेकर मॉस्को गए. 28 मार्च 1941 को बर्लिन पहुंचे. हिटलर से मुलाकात की लेकिन सहायता न मिलने पर निराश हुए. हिटलर ने जापान जाने की सलाह दी.
आज किस नाम से चलती है ट्रेन
साल 2021 तक यह ट्रेन कालका मेल नाम से चलती रही. लोगों कई पीढि़यों ने इस कालका मेल से सफर किया. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर यानी 2021 में भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रेन का नाम ‘नेताजी एक्सप्रेस’ रखा.
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