Ambikapur startup story bansi : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के बंसी ने इंस्टाग्राम से प्रेरित होकर फ्रूट कस्टर्ड का स्टार्टअप शुरू किया. 12वीं तक पढ़े बंसी ने घड़ी चौक में स्टॉल लगाकर रोजाना 1000 रुपये कमाना शुरू किया. इलाके में यह चर्चा का विषय भी बना है.
खास बात यह है कि पूरे अंबिकापुर शहर में फ्रूट कस्टर्ड की यह अनोखी पहल फिलहाल सिर्फ इसी युवक के स्टॉल पर देखने को मिलती है. भले ही युवक ने सिर्फ 12वीं तक ही पढ़ाई की हो, लेकिन उसके हौसले और मेहनत ने उसे आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा दी. आगे पढ़ाई जारी रखने के बजाय उसने खुद का छोटा सा स्टार्टअप शुरू किया और आज इसी काम से अच्छी कमाई कर रहा है. कम लागत में शुरू होने वाला यह फ्रूट कस्टर्ड का बिजनेस किसी भी व्यक्ति के लिए रोजगार का अच्छा विकल्प बन सकता है. युवक रोजाना ताजे फलों से फ्रूट कस्टर्ड तैयार कर बेचता है और इस काम से करीब 1000 रुपये तक की रोजाना कमाई कर लेता है. मेहनत और नए आइडिया के दम पर यह युवक अब दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है.
इंस्टाग्राम से मिली स्टार्टअप की प्रेरणा
बंसी ने लोकल 18 को बताया कि उन्हें इस काम की प्रेरणा इंस्टाग्राम पर वीडियो देखकर मिली. वहां उन्होंने छोटे-छोटे फूड स्टार्टअप के बारे में देखा और सोचा कि उनके शहर में इस तरह का काम कोई नहीं कर रहा है. इसी सोच के साथ उन्होंने खुद ही फ्रूट कस्टर्ड और फ्रूट कट का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.
बंसी ने बताया कि उनके फ्रूट कस्टर्ड और फ्रूट कट में स्ट्रॉबेरी, कीवी, पपीता समेत कई तरह के ताजे फलों का इस्तेमाल किया जाता है. इन फलों को मिलाकर खास मिक्स तैयार किया जाता है, जिसमें स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा शहद और नमक भी डाला जाता है। इससे इसका स्वाद लोगों को काफी पसंद आ रहा है.
सुबह 4 बजे से शुरू हो जाती है तैयारी
युवक ने बताया कि वह रोज सुबह करीब 4 बजे उठकर फलों की कटिंग करते हैं. इसके बाद फलों को पैक कर फ्रीजर में रख देते हैं, ताकि दिनभर उन्हें ताजा रखा जा सके. इसके बाद वह दिनभर इन्हें बेचते हैं.
बंसी के अनुसार उन्होंने यह काम अभी केवल चार दिन पहले ही शुरू किया है, लेकिन लोगों को उनका यह स्टार्टअप काफी पसंद आ रहा है. बिना किसी पोस्टर या प्रचार के ही वह रोज करीब 20 पैकेट तक बेच रहे हैं.
पहले करते थे मजदूरी, अब शुरू किया खुद का काम
बंसी ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है. इससे पहले वह लकड़ी के काम में एक मिस्त्री के साथ हेल्पर के रूप में काम करते थे, जहां उन्हें रोज करीब 250 से 300 रुपये मिलते थे. लेकिन उस काम से ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने खुद का छोटा बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. बंसी ने बताया कि इस छोटे से स्टार्टअप को शुरू करने में करीब 10 से 15 हजार रुपये का खर्च आया. उनके परिवार में माता-पिता, एक बहन और एक भाई हैं और वह घर में सबसे छोटे हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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