पश्चिम चंपारण : बिहार में पश्चिम चंपारण के विनवलिया गांव निवासी बृजकिशोर की कहानी ‘हिम्मत-ए-मर्दा तो मदद-ए-खुदा’ की जीती-जागती मिसाल है. 17 साल की उम्र में गरीबी के कारण 10वीं पास करने के बाद उन्हें गुड़गांव में एक कपड़े की फैक्ट्री में मजदूरी की. जहां शुरुआत में महज 2000 रुपये महीना मिलता था. 10 साल तक वहां काम करते हुए उनकी तनख्वाह 8000 रुपये तक पहुंची, लेकिन बड़ा कुछ करने का जुनून उन्हें घर लौटने पर मजबूर कर दिया. 2016 में उन्होंने अपनी सारी बचत से 3 सिलाई मशीनें खरीदीं और होजरी कपड़ों की सिलाई शुरू की. उस समय जिले में यह काम करने वाले वह अकेले थे. जहां मेहनत और क्वालिटी की वजह से जल्द ही लगाता ऑर्डर मिलने लगा. 2022 तक उन्होंने अपनी कमाई से 10 मशीनों का सेटअप खड़ा कर लिया. 2023 में PMEGP योजना से लोन लेकर अपनी फैक्ट्री लगा ली. आज 42 साल के बृजकिशोर हर महीने ढाई से 3 लाख रुपये कमा रहे हैं. आज सालाना उनकी आमदनी 30 लाख रुपये है. आज उनकी फैक्ट्री विन चीटर, टी-शर्ट, ट्रैक पैंट, इनर वियर, स्पोर्ट्स वियर आदि बन रहे हैं. 20 से अधिक लोगों को आज उन्होंने रोजगार भी दिया है. गरीबी से मजदूरी और फिर सफल उद्यमी तक का उनका सफर प्रेरणा दायक है.
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