Dairy Business Success Story: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में रहने वाले अजय बालापुरकर ने ₹2 लाख का लोन लेकर डेरी बिजनेस शुरू किया और आज सालाना 3 से 4 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं. कई जगह नौकरी करने के बाद उन्होंने पिता की प्रेरणा से खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया. आज वे न सिर्फ खुद सफल हैं बल्कि 3 से 4 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. डेरी व्यवसाय से होने वाली कमाई का एक हिस्सा वे समाज सेवा और धार्मिक कार्यों में लगाते हैं. उनकी कहानी युवाओं को खुद का व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है.
₹2 लाख का लोन और घर से शुरू हुआ डेरी बिजनेस
अजय बताते हैं कि उन्होंने करीब ₹2 लाख का लोन लेकर घर से ही डेरी का छोटा सा काम शुरू किया. शुरुआत आसान नहीं थी. खुद सुबह-सुबह उठकर दूध इकट्ठा करना, फिर फेरी लगाकर दुकानों और घरों तक सप्लाई देना सब कुछ अपने दम पर किया.
धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई. भरोसा बना, ग्राहक बढ़े और काम फैलता गया. आज अजय हर साल करीब 3 से 4 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने 3 से 4 लोगों को रोजगार भी दे रखा है.
खुद करते हैं सप्लाई, ग्राहकों से सीधा जुड़ाव
अजय आज भी जमीन से जुड़े हुए हैं. वे खुद कई दुकानों और घरों तक दूध पहुंचाने जाते हैं. उनका मानना है कि सीधे ग्राहकों से जुड़ाव रखने से भरोसा मजबूत होता है और बिजनेस भी बढ़ता है. उनकी मेहनत और सादगी ही उनकी असली पहचान है.
कमाई का हिस्सा समाज सेवा में
अजय सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं हैं. डेरी से जो भी मुनाफा होता है, उसमें से कुछ हिस्सा वे समाज सेवा के कामों में लगाते हैं. उन्होंने अपने क्षेत्र में मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है और “विठ्ठल सेवा समिति” नाम की एक समिति भी बनाई है.
इस समिति से करीब 50 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. सभी लोग अपने घर खर्च से थोड़ी-थोड़ी बचत कर सेवा और धार्मिक आयोजनों में योगदान देते हैं. अजय इस समिति में अहम भूमिका निभाते हैं और समय-समय पर जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं.
युवाओं के लिए संदेश
अजय बालापुरकर की कहानी यही सिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो छोटा सा लोन भी बड़े सपने पूरे कर सकता है. नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना जोखिम जरूर है, लेकिन मेहनत और लगन हो तो सफलता दूर नहीं रहती.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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