रुओमिंग पैंग को मेटा से छिनकर ओपनएआई ने भारी-भरकम पैकेज पर अपने पाले में कर लिया है. पिछले 12 महीनों से भी कम समय से तीन बड़ी कंपनियां बदलकर पैंग ने तहलका मचा रखा है. आखिर क्यों हर बड़ी टेक कंपनी उन्हें अपने पाले में करना चाहती है, आइये जानते हैं..
रुओमिंग पैंग का जन्म चीन में हुआ था.
रुओमिंग पैंग की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेटा ने उन्हें एआई रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर जोड़ने के लिए 200 मिलियन डॉलर (करीब 1800 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम पैकेज दिया है. जुलाई 2025 में मेटा से जुड़ने से पहले, वह ऐपल में एआई मॉडल्स टीम के हेड थे. लेकिन एआई की इस रेस में खुद को सबसे आगे रखने के लिए ओपनएआई ने हार नहीं मानी और आखिरकार पैंग को अपना हिस्सा बना ही लिया.
गूगल में भी कर चुके हैं काम
पैंग ने अपने करियर का सबसे लंबा और सुनहरा समय गूगल में बिताया. 2006 से 2012 के बीच उन्होंने बिगटेबल इंडेक्स जैसे क्रांतिकारी प्रोजेक्ट्स की नींव रखी. इतना ही नहीं, उन्होंने गूगल के ग्लोबल ऑथराइजेशन सिस्टम ‘Zanzibar’ की सह-स्थापना की, जो आज भी तकनीक की दुनिया में एक मील का पत्थर माना जाता है. गूगल ब्रेन में रहते हुए उन्होंने ‘बेबेफिश’ जैसे डीप लर्निंग फ्रेमवर्क पर काम किया, जो गूगल के अपने डेटा सेंटर (TPU) में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सिस्टम बना.
रुओमिंग पैंग एजुकेशन
रुओमिंग पैंग की इस सफलता के पीछे उनकी ठोस शैक्षिक पृष्ठभूमि है. शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई शुरू करने वाले पैंग ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की. आज उनकी विशेषज्ञता एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में है. यही वो बुनियादी ढांचा है जिस पर भविष्य की पूरी एआई दुनिया टिकी हुई है. यही वजह है कि आज ऐपल, गूगल और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियां उन्हें ‘छोड़ने’ का गम मना रही हैं और ओपनएआई अपनी जीत का जश्न.
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