क्या आप जानते हैं कि खेतों और सड़कों के किनारे उगने वाला बेकार खरपतवार आपके घर का चूल्हा जला सकता है? जहानाबाद की 14 वर्षीय छात्रा शैलजा गौरी ने ‘बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम’ में इसी कचरे से बायोगैस बनाने का सफल मॉडल पेश कर राज्य स्तर पर सम्मान पाया है. नौवीं कक्षा की छात्रा शैलजा ने अपने प्रोजेक्ट में दिखाया कि अनुपयोगी खरपतवार को अगर गोबर के साथ मिलाकर प्रोसेस किया जाए, तो इससे उच्च गुणवत्ता वाली बायोगैस प्राप्त की जा सकती है. यह तकनीक न केवल किसानों को खरपतवार के संकट से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का एक सस्ता विकल्प भी बनेगी.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.