E-Way Bill New Rule : सरकार ने ई-वे बिल के नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. इसे अगली जीएसटी बैठक में पेश भी किया जाएगा. इसका मकसद जीएसटी चोरी पर लगाम लगाना और कारोबार को आसान करना है.
ई-वे बिल में सरकार कुछ बदलाव करने जा रही है.
ई-वे बिल में सुधार से लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में बड़े पैमाने पर डिरेगुलेशन होगा, जिससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी. साथ ही कर प्रशासन के लिए प्रभावी और गैर-हस्तक्षेपकारी निगरानी बनी रहेगी. सूत्र ने कहा कि हम राज्यों के साथ ई-वे बिल सुधार पर काम कर रहे हैं और इसे जीएसटी काउंसिल के सामने लाएंगे. केंद्रीय वित्तमंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल, जिसमें राज्य मंत्री भी शामिल हैं, की पिछली बैठक 3 सितंबर 2025 को हुई थी. इसमें 375 वस्तुओं पर टैक्स दरें घटाने और स्लैब्स को तर्कसंगत बनाने का फैसला लिया गया था.
काउंसिल में जल्द होगी चर्चा
सूत्र ने बताया कि ई-वे बिल का प्रस्ताव जीएसटी काउंसिल के सामने तब रखा जाएगा जब सभी विचार-विमर्श पूरे हो जाएंगे. सर्वेक्षण में ई-सील और इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के व्यापक उपयोग का सुझाव दिया गया है, जिन्हें ई-वे बिल और वाहन ट्रैकिंग तकनीकों के साथ जोड़ा जाए, ताकि सड़क पर बार-बार रुकावट के बिना माल की सुरक्षित, एंड-टू-एंड ट्रैकिंग सुनिश्चित की जा सके. राज्य सरकारें, जो फील्ड स्तर पर निगरानी में अहम भूमिका निभाती हैं, उन्हें जोखिम आधारित, सिस्टम जनरेटेड अलर्ट और विवेकाधीन जांच को सीमित करने के लिए इस बदलाव में मुख्य भागीदार बनना होगा.
क्या काम करता है ई-वे बिल
सर्वेक्षण में यह भी सुझाव दिया गया है कि नीति निर्माण में भरोसे और तकनीक आधारित अनुपालन मॉडल पर अधिक जोर दिया जाए. जैसे कि विश्वसनीय डीलर फ्रेमवर्क, जिसमें मजबूत अनुपालन रिकॉर्ड वाले करदाताओं को न्यूनतम भौतिक जांच का सामना करना पड़े और माल के आवागमन में अधिक निश्चितता मिले. जब 1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुआ था, तब राज्यों के बीच भौतिक चेक पोस्ट समाप्त कर दिए गए थे, जो एक बड़ा संरचनात्मक सुधार था, जिससे माल के मुक्त आवागमन और ट्रांजिट में देरी में काफी कमी आई थी.
50 हजार से ज्यादा के सामान पर लागू
ई-वे बिल सिस्टम एक प्रभावी डिजिटल विकल्प के रूप में सामने आया, जिससे माल के आवागमन की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हुई और कर प्रशासन के उद्देश्यों को बिना राज्य सीमा पर भौतिक बाधाएं लगाए पूरा किया जा सका. जीएसटी के तहत, 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का माल ले जाने वाले व्यक्ति को ई-वे बिल रखना अनिवार्य है. यह दस्तावेज जीएसटी पोर्टल से जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति या ट्रांसपोर्टर द्वारा माल के परिवहन से पहले जनरेट किया जाना जरूरी है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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