Stationary Business Success Story: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के मनीष रघुवंशी की यह सफलता की कहानी हर छोटे व्यापारी और युवा के लिए प्रेरणा है. उन्होंने सिर्फ डेढ़ लाख रुपए का लोन लेकर किराए की दुकान से स्टेशनरी का छोटा सा बिजनेस शुरू किया था. शुरुआती दिनों में इतनी मुश्किलें आईं कि कई बार दुकान का खर्च तक निकालना मुश्किल हो जाता था. लेकिन मेहनत और हिम्मत के दम पर उन्होंने अपने कारोबार को इतना बढ़ाया कि आज 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. पढ़िए कैसे संघर्ष से सफलता तक पहुंची यह शानदार बिजनेस स्टोरी.
मौसी के बेटों से मिली बिजनेस की प्रेरणा
मनीष रघुवंशी बताते हैं कि उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई पूरी की थी. पढ़ाई के बाद उन्हें अपनी मौसी के बेटों से स्टेशनरी के कारोबार की प्रेरणा मिली. बस यहीं से उन्होंने तय कर लिया कि नौकरी के पीछे भागने के बजाय खुद का काम शुरू करेंगे. उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपए का लोन लिया और साल 2006 में किराए की छोटी सी दुकान से स्टेशनरी और फोटोकॉपी का काम शुरू कर दिया.
शुरुआत में इतनी मुश्किलें कि वेतन तक नहीं निकलता था
शुरुआती समय आसान नहीं था. मनीष बताते हैं कि दुकान पर ग्राहक कम आते थे और आमदनी इतनी नहीं होती थी कि ठीक से खर्च निकल सके. उस समय पिता और दोनों भाई मिलकर दुकान संभालते थे. कई बार ऐसा भी होता था कि पूरे महीने की मेहनत के बाद भी ठीक से वेतन नहीं निकल पाता था. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे.
मेहनत रंग लाई, अब खुद की दुकान और 10 लोगों को रोजगार
धीरे-धीरे दुकान चलने लगी और ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई. मेहनत का ही नतीजा है कि आज सिटी पैलेस के पास “रघुवंशी बुक डिपो” नाम से उनकी खुद की दुकान है. अब उनके यहां सिर्फ स्टेशनरी और फोटोकॉपी ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के फॉर्म और कई दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं. कारोबार बढ़ने के साथ-साथ उन्होंने करीब 10 लोगों को रोजगार भी दिया है.
सालाना 6 से 7 लाख रुपए की कमाई
मनीष रघुवंशी बताते हैं कि आज उनके इस कारोबार से करीब 6 से 7 लाख रुपए की सालाना कमाई हो जाती है. उनका सपना है कि आगे भी बिजनेस को बढ़ाया जाए और ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए. उनकी कहानी यह बताती है कि छोटा सा काम भी अगर ईमानदारी और मेहनत से किया जाए तो वही एक दिन बड़ी सफलता की वजह बन सकता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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