Success Story: श्वेता भारद्वाज ने गौरा एस्ट्रो प्रेडिक्शन शुरू कर एस्ट्रोलॉजी, टैरो और न्यूमरोलॉजी में देश विदेश में पहचान बनाई हैं. वह अपनी बेटी गौरा के लिए संघर्ष कर आत्मनिर्भरता हासिल की हैं. बता दें कि बेटी होने पर पति ने साथ छोड़ दिया था.
श्वेता भारद्वाज की एस्ट्रोलॉजी, जो कभी उनका पेशा था. अब उनका जुनून और आत्मनिर्भरता का हथियार बन गया. आज हालात यह है कि श्वेता भारद्वाज के क्लाइंट सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैले हुए हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो परिस्थितियां कितनी भी कठोर क्यों न हों, एक मां अपनी बेटी के भविष्य के लिए पूरी दुनिया से लड़ सकती है. आइये जानते हैं सफल वुमेन श्वेता भारद्वाज सफल के बारे में.
12 लाख की नौकरी छोड़कर बनी एस्ट्रोलॉजर
श्वेता भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने गौरा एस्ट्रो प्रेडिक्शन नाम से अपना बिजनेस शुरू किया है. जहां पर उनके क्लाइंट ऑनलाइन उनसे जुड़ते हैं. वह अपनी क्लाइंट की कुंडली और मूलांक के अनुसार भी लोगों को उनका भविष्य बताती हैं. अपना यहां तक का सफर शुरू से बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी एस्ट्रोलॉजी की पढ़ाई भारतीय विद्या भवन से की थी. इसके बाद उनकी जिंदगी में उनके पति आए. दोस्ती हुई और यहीं से बात लव मैरिज तक पहुंची. शुरू में वह अपने दोस्तों की कुंडली फ्री में देखती थी. फिर आईटी कंपनी में नौकरी करने लगी. जहां 12 लाख रुपए का पैकेज था. वहां पर भी अपने साथियों की कुंडली देखकर उनका भविष्य बताती थी.
वहीं, पर कंपनी के दोस्तों ने उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा कि क्यों ना श्वेता एस्ट्रोलॉजी पर अपना पूरा फोकस करो. क्योंकि उनकी भविष्यवाणी सही निकलती थी. यहीं से प्रोत्साहन लेकर उन्होंने पति के साथ बिजनेस शुरू किया. सब कुछ अच्छा चल रहा था. एक साल में 50 लाख रुपए की कमाई हो रही थी, लेकिन तभी बेटी गौरा का जन्म हुआ और पति से रिश्ते बिगड़ गए. पति ने बेटी और पत्नी दोनों से रिश्ता तोड़ दिया और वह अपनी मां और पिता के घर आ गई.
बेटी को वेंटीलेटर से खींच लाई
श्वेता भारद्वाज ने बताया कि आज अगर वह जिंदा हैं तो अपनी मां की वजह से. क्योंकि यहां पर उनकी मां ने बहुत सहयोग किया. वजह यह थी कि जिंदगी में अचानक उतार-चढ़ाव आ गए थे. बेटी के होने के बाद दो बड़े ऑपरेशन उनके हुए. फिर बेटी भी बीमार पड़ गई. उसका भी एक बड़ा ऑपरेशन 14 माह में हुआ. बेटी वेंटीलेटर तक पहुंच गई थी, लेकिन दिन-रात एक करके वह अपनी बेटी को वेंटीलेटर से खींच लाई.
उन्होंने बताया कि बेटी के लिए 6 अस्पतालों की दौड़ लगाई थी, लेकिन धीरे-धीरे करके हालत अब सही हुए हैं. उनकी सेहत और बेटी की सेहत अब सही है. उन्होंने बताया कि अब वह एस्ट्रोलॉजी के साथ-साथ टैरो कार्ड रीडर और न्यूमरोलॉजी इन तीनों पर अपना फोकस कर रही हैं. वह सब कुछ ऑनलाइन करती हैं. अगर कोई अपनी कुंडली दिखाना चाहता है तो वो उनको गौरा एस्ट्रो प्रेडिक्शन पर संपर्क कर सकता है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें
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