Vande Bharat sleeper: भारतीय की पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन 17 जनवरी को चलने वाली है. ट्रेन में तमाम खासियत हैं, उनमें एक प्रमुख यूवीसी तकनीक है. इस तकनीक से वायरल फैलने की संभावना नहीं होगी. अगर आपके पड़ोसी को सर्दी जुकाम है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. वायरस फैलने का खतरा नहीं होगा.
Vande Bharat sleeper: भारतीय की पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन 17 जनवरी को चलने वाली है. ट्रेन में तमाम खासियत हैं, उनमें एक प्रमुख यूवीसी तकनीक है. इस तकनीक से वायरल फैलने की संभावना नहीं होगी. अगर आपके पड़ोसी को सर्दी जुकाम है, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है. वायरस फैलने का खतरा नहीं होगा.
स्लीपर वंदेभारत स्लीपर में सामान रखने के लिए ओवरहेड रैक, बर्थ के नीचे स्टोरेज और कोच एंट्री के पास बड़े बैग के लिए जगह बनाई गयी है. जबकि चेयरकार में केवल ओवरहेड रैक ही होते थे. स्लीपर में ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टिब्यूल का इस्तेमाल किया गया है. एक कोच से दूसरे कोच में जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे लगे हुए हैं, जिससे आसानी से आ सकते हैं.
कैसे बैक्टीरिया होंगे खत्म
रेलवे मंत्रालय के अनुसार कोच में यूवीसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे हवा में वायरस डिसइनफेक्टेंट हो जाएंगे. यह उपकरण हवा खींचता है और फिर उसे फ्रेश करके दोबारा कोच में छोड़ेगा. अगर इसमें बैक्टीरिया हुए तो खत्म हो जाएंगे. उदाहरण के तौर पर आपने शॉप पर नीली रोशनी वाली लाइट लगी देखी होगी और उसमें मच्छर, मक्खी या अन्य कीट फंसते हैं और मर जाते हैं. उसी तरह यूवीसी तकनीक में बैक्टीरिया फंस कर खत्म जाएंगे.
सफोकेशन के लिए एसी की खास तकनीक
कई आर आपने फ्लाइट में सफर के दौरान अनुभव किया होगा कि अचानक सफोकेशन महसूस होता है. इस बात का स्लीपर वंदेभारत में खास ध्यान रखा गया है, एसी में नई तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसा बनाया गया है जिससे सफोकेशन जैसी समस्या न हो. यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए तमाम रिसर्च के बाद ट्रेन सेट तैयार किया गया है.
झटके रोकने के लिए क्या है
वंदेभारत स्लीपर की एयर स्प्रिंग के प्रेशर को मॉडिफाई किया गया है. स्प्रिंग में हाइट कितनी होनी चाहिए, कितनी मोटी होनी चाहिए, जिससे ट्रेन में झटका न लगे. क्योंकि इस ट्रेन का वजन चेयरकार के मुकाबले एक टन के करीब अधिक है. इस तरह सस्पेंशन पर पूरा फोकस किया गया. जिससे कोच एडिशनल वजन हैंडल कर सके. कोच में प्राइमरी और सेकेंडरी सस्पेंशन पर खास ध्यान दिया गया है, इनको बेहतर किया गया है. वेट डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस किया गया है.
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