दरअसल, भारत के पास न सिर्फ पर्याप्त तेल भंडार है, बल्कि एक मजबूत सप्लाई चेन भी है, जो अलग-अलग देशों से लगातार तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करती है. आइए समझते हैं कि देश के तेल भंडार और सप्लाई सिस्टम की असली स्थिति क्या है.
तेल भंडार के असली आंकड़े
3 मार्च 2026 को सरकारी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में छपा कि भारत के पास कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का रिजर्व मौजूद है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने समाचार एजेंसियों और मीडिया संस्थानों को बताया कि देश में तेल आपूर्ति की लगातार निगरानी की जा रही है. इसके लिए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. इसके साथ ही यह भी बताया गया कि पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड ईंधनों का लगभग 25 दिन का अतिरिक्त स्टॉक भी उपलब्ध है. यानी कुल मिलाकर देश के पास करीब 50 दिनों तक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की क्षमता है. यह जानकारी उस समय सामने आई जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका जताई जा रही थी.
इससे पहले फरवरी 2026 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा था कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserve) और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर भारत के पास करीब 74 दिनों की तेल जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है. यह आंकड़े पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (Petroleum Planning and Analysis Cell) और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) के मानकों के आधार पर तैयार किए जाते हैं.
एनालिसिस फर्म केप्लर (Kpler) के अनुमान के मुताबिक भारत के पास लगभग 100 मिलियन बैरल कमर्शियल क्रूड स्टॉक मौजूद है, जो देश की रोजाना लगभग 5 मिलियन बैरल खपत के हिसाब से 40 से 45 दिनों तक चल सकता है.
भारत का कहां-कहां से आता है तेल?
भारत ने बीते कुछ वर्षों में अपनी तेल खरीद की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अब देश केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है बल्कि कई अलग-अलग क्षेत्रों से तेल खरीद रहा है. इसे “ऑयल बास्केट डाइवर्सिफिकेशन” कहा जाता है.
रूस
फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है. कुल आयात का लगभग 35 से 38 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है. पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों के जरिए यह आपूर्ति जारी रखी है. वर्ष 2025 के दौरान भारत रोजाना करीब 1.40 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद रहा था.
इराक
इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है जिसकी हिस्सेदारी लगभग 18 से 20 प्रतिशत के आसपास है. बसरा मीडियम और बसरा हैवी जैसे तेल ग्रेड भारतीय रिफाइनरियों के लिए काफी उपयुक्त माने जाते हैं, इसलिए इनकी मांग लगातार बनी रहती है.
सऊदी अरब
सऊदी अरब भी भारत का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है. फरवरी 2026 तक इसकी हिस्सेदारी करीब 13 से 15 प्रतिशत के बीच रही. सऊदी अरब के साथ लंबे समय के तेल आपूर्ति समझौते कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं.
अमेरिका
इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका भी तेजी से भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हुआ है. फरवरी 2026 तक अमेरिका से आने वाले तेल की हिस्सेदारी करीब 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है. लाल सागर में तनाव के दौरान अमेरिकी तेल सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आया.
संयुक्त अरब अमीरात
संयुक्त अरब अमीरात के अलावा ब्राजील और गुयाना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों से भी भारत तेल खरीद बढ़ा रहा है. इससे मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है.
जमीन के नीचे छिपा भारत का ‘खजाना’
आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए भारत ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व नाम का विशेष भंडारण सिस्टम बनाया है. इसमें जमीन के नीचे विशाल गुफाओं में लाखों टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है.
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में लगभग 1.33 मिलियन मीट्रिक टन तेल संग्रह की क्षमता है. कर्नाटक के मंगलुरु में करीब 1.5 मिलियन मीट्रिक टन और पाडुर में लगभग 2.5 मिलियन मीट्रिक टन तेल संग्रहित किया जा सकता है.
सरकार अब इस परियोजना का दूसरा चरण भी आगे बढ़ा रही है. इसके तहत ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पाडुर में नए और बड़े भंडारण केंद्र बनाए जाने की योजना है. इनका उद्देश्य यही है कि अगर वैश्विक सप्लाई में अचानक बाधा आए तो भी भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योग प्रभावित न हों.
भविष्य के लिए क्या है भारत की ऊर्जा रणनीति
भारत अब धीरे-धीरे ऊर्जा के नए विकल्पों की ओर भी बढ़ रहा है ताकि कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सके. सरकार का फोकस “एनर्जी मिक्स” तैयार करने पर है. पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे आयातित तेल पर खर्च कम होगा. इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य में पेट्रोल और डीजल की मांग कम हो सके.
इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन को भी ऊर्जा के नए विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है, खासतौर पर भारी उद्योग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए. कुल मिलाकर साफ है कि भारत के पास तेल खत्म होने का डर उतना वास्तविक नहीं है जितना अक्सर चर्चा में दिखता है. मजबूत भंडार, विविध सप्लाई नेटवर्क और भविष्य की ऊर्जा रणनीतियों की वजह से देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रहा है.
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