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एनटीपीसी के साथ समझौता किया.कार्बन प्रबंधन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. जो दोनों आर्गनाइजेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ.यह एमओयू एनटीपीसी को कार्बन प्रबंधन में परामर्श और सलाहकारी सेवाएं देने का औपचारिक ढांचा देगा.
समझौते के मौके पर एनटीपीसी और एनवीवीए के अधिकारी.
यह कदम कार्बन बाजारों और पर्यावरणीय परिसंपत्तियों का उपयोग कर सतत विकास और ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में एनटीपीसी की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा.एनटीपीसी वर्तमान में 87 गीगावॉट से ज्यादा स्थापित क्षमता का ऑपरेशन कर रही है. कंपनी के पास 32 गीगावॉट क्षमता निर्माणाधीन है. एनटीपीसी ने 2032 तक 149 गीगावॉट क्षमता (जिसमें 60 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है) और 2037 तक 244 गीगावॉट क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.
कंपनी थर्मल, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा के विविध पोर्टफोलियो के साथ देश को विश्वसनीय, किफायती और सतत बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.बिजली उत्पादन के अलावा एनटीपीसी ने ई-मोबिलिटी, बैटरी भंडारण, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, अपशिष्ट से ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में भी कदम रखे हैं.
एनवीवीएन एनटीपीसी की विद्युत व्यापार इकाई के रूप में काम करती है. इसे केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) से श्रेणी-I का विद्युत व्यापार लाइसेंस मिला है. एनवीवीएन ने मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन किया है. यह एनटीपीसी के सतत और एकीकृत ऊर्जा समाधानों की ओर संक्रमण में रणनीतिक भूमिका निभा रही है.यह समझौता एनटीपीसी के कार्बन न्यूट्रल लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा. कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग से कंपनी को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा. इससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता मजबूत होगी.
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