ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि विदेशी कंपनियों और देशों पर लगाए गए टैरिफ की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है. उनका दावा है कि दशकों से चला आ रहा ट्रेड घाटा अब इतिहास बनने वाला है.
ब्लूमबर्ग और सरकारी डेटा क्या कहता है
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 में अमेरिका का ट्रेड घाटा बढ़कर 70.3 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले महीने से ज्यादा है. पूरे साल 2025 का ट्रेड घाटा 901.5 अरब डॉलर रहा, जो 1960 के बाद के सबसे बड़े घाटों में से एक माना जा रहा है. दिसंबर में अमेरिका के इंपोर्ट में 3.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि एक्सपोर्ट में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ होता है कि अमेरिका की विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम नहीं हुई, बल्कि कई सेक्टर में बढ़ गई.
टैरिफ नीति से क्यों बढ़ी अस्थिरता
2025 में अमेरिकी ट्रेड डेटा महीने दर महीने काफी अस्थिर रहा, क्योंकि कंपनियां ट्रंप के लगातार टैरिफ ऐलानों पर प्रतिक्रिया दे रही थीं. कई कंपनियों ने ज्यादा टैक्स से बचने के लिए पहले ही बड़े पैमाने पर इंपोर्ट कर लिया, जिससे इंपोर्ट आंकड़ों में उछाल आया.
खास तौर पर सोना और दवाओं के इंपोर्ट में भारी उतार चढ़ाव देखा गया, क्योंकि कंपनियां टैरिफ लागू होने से पहले स्टॉक जमा करने की कोशिश कर रही थीं.
एआई निवेश बना इंपोर्ट बढ़ने की बड़ी वजह
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में अमेरिका ने कंप्यूटर और एआई से जुड़े उपकरणों के इंपोर्ट में करीब 145 अरब डॉलर की अतिरिक्त खरीदारी की. यह दिखाता है कि अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में भारी निवेश चल रहा है और इसके लिए विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता बढ़ गई है. दिसंबर में कंप्यूटर एक्सेसरीज और मोटर वाहनों के इंपोर्ट में खास बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो घरेलू मांग के मजबूत रहने का संकेत देता है.
जीडीपी पर ट्रेड डेटा का असर
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक ट्रेड डेटा चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को समझने में मदद करेगा. अटलांटा फेडरल रिजर्व के जीडीपी नाउ अनुमान के अनुसार, नेट एक्सपोर्ट ने जीडीपी ग्रोथ में लगभग 0.6 प्रतिशत योगदान दिया और चौथी तिमाही की ग्रोथ करीब 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. हालांकि ब्लूमबर्ग इकनॉमिक्स का कहना है कि नेट एक्सपोर्ट का योगदान सीमित रहा और एआई से जुड़े कैपिटल गुड्स का इंपोर्ट मजबूत घरेलू निवेश का संकेत देता है.
चीन के साथ घाटा घटा लेकिन नया ट्रेंड दिखा
2025 में चीन के साथ अमेरिका का ट्रेड घाटा घटकर करीब 202 अरब डॉलर रह गया, जो 20 साल में सबसे कम है. यह ट्रंप द्वारा चीनी सामान पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ का असर माना जा रहा है. लेकिन रिपोर्ट बताती है कि ट्रेड फ्लो पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, बल्कि मेक्सिको और वियतनाम जैसे देशों के जरिए रीरूट हो गया. इन देशों के साथ अमेरिका का ट्रेड घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. वहीं ताइवान के साथ घाटा बढ़कर 146.8 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
ट्रंप के दावे और आर्थिक हकीकत में फर्क क्यों
ट्रंप का दावा है कि टैरिफ नीति से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है और ट्रेड घाटा घटा है. लेकिन आर्थिक डेटा दिखाता है कि इंपोर्ट अभी भी ऊंचा है और ट्रेड घाटा ऐतिहासिक रूप से बड़ा बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ से कुछ सेक्टर को फायदा जरूर हुआ, लेकिन कंपनियों ने सप्लाई चेन को चीन से हटाकर दूसरे देशों में शिफ्ट कर दिया, जिससे कुल ट्रेड घाटा कम नहीं हुआ, बल्कि सिर्फ देशों का पैटर्न बदल गया.
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