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Crude Price in 2026 : ईरान युद्ध से पश्चिम एशिया में जन्मे संकट की वजह से क्रूड के दाम अभी भले ही 85 डॉलर के आसपास पहुंच गए हों, लेकिन साल 2026 में इसकी औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल तक ही रहने का अनुमान है. यह दावा किया है ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने. एजेंसी ने बताया कि होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहने का अनुमान नहीं है, जिससे कीमतों पर भी ज्यादा देर तक असर नहीं पड़ेगा.
ईरान युद्ध की वजह से क्रूड के भाव 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं.
फिच ने कहा कि यह जलडमरूमध्य अभी औपचारिक रूप से बंद नहीं हुआ है, लेकिन ईरान या उससे जुड़े समूहों के संभावित हमलों के जोखिम को देखते हुए कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं. सुरक्षा कारणों से कुछ तेल कंपनियों ने अपनी खेप रोक दी है, जबकि बीमा कंपनियां जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा को रद्द कर रही हैं. फिच ने कहा कि हमने दिसंबर में 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया था. हमें अब भी उस अनुमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है.
तनाव से बढ़ रही क्रूड की कीमत
फिच ने कहा कि ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल के साझा हमलों और ईरान के पलटवार के बीच समूचे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बन गई है. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत जनवरी-फरवरी, 2026 के औसत 66-67 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 82-84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री तेल परिवहन का एक अहम मार्ग है. लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है.
कितना तेल आता है इस रास्ते
रेटिंग एजेंसी ने बताया कि संघर्ष से पहले प्रतिदिन करीब दो करोड़ बैरल कच्चा तेल एवं पेट्रोलियम उत्पाद इस मार्ग से गुजरते थे, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई और वैश्विक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा है. हालांकि, जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावी रूप से बंद रहता है या क्षेत्र के तेल एवं गैस उत्पादन तथा परिवहन ढांचे को गंभीर नुकसान होता है, तो तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है और कीमतों में अधिक तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है.
क्यों क्रूड होता है ज्यादा प्रभावित
युद्ध चाहे किसी भी देश में हो, सबसे पहले कच्चे तेल पर ही इसका असर दिखता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के हर दिशा में तेल उत्पादक देश हैं और सभी क्रूड की सप्लाई करते हैं. अब चाहे युद्ध रूस और यू्क्रेन का हो या फिर ईरान और इजराइल का, तेल उत्पादक देशों और उसकी सप्लाई पर असर जरूर पड़ता है. तेल की कीमतों पर इसका बात का असर जरूर पड़ता है कि इस युद्ध का असर किस हिस्से पर ज्यादा दिख रहा है. जैसे इस बार मिडल ईस्ट इस युद्ध में तप रहा, जो सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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