Budget 2026 : अगले महीने की पहली तारीख को साल 2026 को आने वाला है. इस बार भी बजट से मिडिल क्लास को काफी उम्मीदें हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि नए रिजीम में भी इस बार कुछ डिडक्शन शामिल किया जा सकता है.
साल 2025 के बजट में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम में मिलने वाली टैक्स छूट को सीधे बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया था, जिससे यह नौकरीपेशा लोगों के लिए डिफॉल्ट च्वाइस बन गया था और 90 फीसदी से ज्यादा करदाताओं ने इसी रिजीम का चुनाव किया था. अब साल 2026 का बजट नजदीक आ रहा है और एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इस बार भी नए रिजीम में कुछ बदलाव हो सकता है, जो नौकरीपेशा और मिडिल क्लास की बचत और बढ़ा सकता है.
हो सकते हैं 5 बड़े बदलाव
सरकार ने नई टैक्स रिजीम को शुरू ही इसलिए किया था, ताकि इसमें डिडक्शन देन की झंझट न हो. यही वजह है कि नए रिजीम को इतना आकर्षक बनाया गया, ताकि ज्यादातर लोग इसमें शिफ्ट हो सकें. बावजूद इसके होम लोन चुकाने वालों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आज भी पुराना टैक्स रिजीम कारगर है. यही वजह है कि करदाताओं का एक तबका लंबे समय से नए रिजीम में भी कुछ डिडक्शन को शामिल किए जाने की मांग कर रहा है. एक्सपर्ट ने भी अनुमान लगाया है कि इस बार के बजट में 5 बड़े बदलाव नए रिजीम किए जा सकते हैं.
यहां मिल सकती है राहत
- लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट : एक्सपर्ट का मानना है कि नए रिजीम का सेलेक्शन आज ज्यादातर करदाता करते हैं. ऐसे में लॉन्ग टर्म निवेश की बात पीछे छूट जाती है, क्योंकि इसके लिए कोई प्रोत्साहन नहीं है. सरकार को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर लिमिट को 1 लाख से बढ़ाकर 1 या 3 लाख रुपये करनी चाहिए, ताकि निवेशक ज्यादा भरोसे के साथ शेयर बाजार में पैसे लगा सकें.
- HRA और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी : नए रिजीम में न तो एचआरए यानी हाउस रेंट अलाउंस का फायदा मिलता है और न ही मेडिकल इंश्योरेंस क्लेम करने की सुविधा. मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में नए रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस को जरूर शामिल किया जाना चाहिए. एक्सपर्ट का भी मानना है कि एचआरए में हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिक्लेम जैसे डिडक्शन शामिल हो जाएं तो मिडिल क्लास पर बोझ कम हो जाएगा.
- होम और एजुकेशन लोन : नए रिजीम में सबसे ज्यादा डिमांड होम और एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट दिए जाने की है. पुरानी टैक्स रिजीम में इसका फायदा मिलता है. एक्सपर्ट का कहना है कि इसके शामिल होने से नया रिजीम जटिल भी नहीं होगा और लोगों को काफी राहत मिलेगी.
- स्टैंडर्ड डिडक्शन : नए रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50 से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया गया था. एक्सपर्ट ने सुझाव दिया है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए इसकी लिमिट बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि अब खर्चा भी ज्यादा बढ़ रहा है. लिहाजा इस लिमिट को 1 लाख या सवा लाख रुपये तक होना चाहिए.
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ खास : जहां 90 फीसदी से ज्यादा करदाताओं ने नया रिजीम अपना लिया है, वहीं वरिष्ठ नागरिक अभी तक इससे दूरी बनाए हुए हैं. इसमें मेडिकल खर्च में टैक्स छूट न होना और बेसिक छूट की लिमिट कम होना सबसे बड़ा कारण है. एक्सपर्ट का अनुमान है कि इस बार के बजट में बुजुर्गों के लिए कुछ खास व्यवस्था की जा सकती है.
कुल कितनी हो जाएगी छूट
- अगर मान लें कि ऊपर दी गई मांगों पर सरकार ऐलान कर देती है तो स्टैंडर्ड डिडक्शन पर 1 लाख की छूट मिलेगी.
- होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये और मूल पर 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट मिल जाएगी.
- हेल्थ इंश्योरेंस पर भी 50 हजार रुपये तक छूट मिल जाएगी.
- इसमें 12 लाख रुपये मिलने वाली सीधी टैक्स छूट को शामिल कर लें तो छूट हो जाएगी 17 लाख रुपये.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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