वुड मैकेंजी ने 2025 की पहली छमाही के लिए अपनी ताजा “ग्लोबल सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर रैंकिंग” रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सोलर पैनल कंपनियों को शिपमेंट, बैंकबिलिटी और परफॉर्मेंस के आधार पर आंका गया है. JA Solar और Trinasolar ने संयुक्त रूप से टॉप रैंक हासिल की, जिनके स्कोर क्रमशः 91.7 और 91.6 रहे, जबकि Adani Solar का स्कोर 81 रहा. वुड मैकेंजी कंपनियों को 10 मानदंडों पर आंकता है, जैसे थर्ड-पार्टी रिलायबिलिटी टेस्टिंग, फाइनेंशियल हेल्थ, मैन्युफैक्चरिंग ट्रैक रिकॉर्ड और पेटेंट एक्टिविटी.
किन्हें मिलता है ग्रेड ए
Grade A रेटिंग इंडस्ट्री के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड्स को पूरा करने वाली कंपनियों के लिए एक स्वतंत्र बेंचमार्क है. Adani Solar की रेटिंग टेक्नोलॉजी क्षमता, सप्लाई चेन मजबूती, वर्टिकल इंटीग्रेशन, रिसर्च और डेवलपमेंट, पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस प्रैक्टिसेज, और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी जैसे पहलुओं में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है. जबकि चीनी कंपनियां अभी भी ग्लोबल टॉप 10 में हावी हैं, रिपोर्ट में भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और अमेरिका की मौजूदगी के साथ प्रतिस्पर्धा का दायरा बढ़ने की बात कही गई है.
2.2 अरब डॉलर का घाटा
टॉप 10 कंपनियों ने 2025 की पहली छमाही में कुल 2.2 बिलियन डॉलर का नेट लॉस दर्ज किया, जो कीमतों में भारी गिरावट के कारण हुआ, लेकिन सभी गैर-चीनी कंपनियां प्रीमियम और सुरक्षित बाजारों पर ध्यान देकर मुनाफे में रहीं. इन कंपनियों ने 2025 की पहली छमाही में औसतन 70 प्रतिशत यूटिलाइजेशन रेट बनाए रखा, जबकि बाकी कंपनियों का ग्लोबल औसत सिर्फ 43 प्रतिशत रहा. Adani Solar और DMEGC Solar ने 100 प्रतिशत यूटिलाइजेशन रेट बनाए रखा. टॉप 10 कंपनियों ने मिलकर 224 GW मॉड्यूल शिप किए, जो साल की पहली छमाही में ग्लोबल शिपमेंट का 75 प्रतिशत है. भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और अमेरिका की कंपनियों का उभरना दिखाता है कि प्रतिस्पर्धा अब चीन से आगे बढ़ रही है, खासकर सख्त ट्रेड पॉलिसीज के चलते.
अडानी सोलर का व्यापार
अडानी सोलर ने 2025 तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 15,000 MW से ज्यादा सोलर मॉड्यूल शिप किए हैं, जिसमें से 10,000 MW भारत में और 5,000 MW विदेशों में भेजे गए. करीब 70 प्रतिशत मॉड्यूल भारत में इन-हाउस बने सोलर सेल्स से तैयार हुए हैं, जिससे कंपनी की इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दिखती है. कंपनी ने 8,000 से ज्यादा डायरेक्ट और कई इनडायरेक्ट ग्रीन जॉब्स दिए हैं. कंपनी अगले वित्त वर्ष तक अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 10,000 MW सालाना तक बढ़ाने की योजना बना रही है. गुजरात के मुंद्रा में इसकी फैक्ट्री अगली पीढ़ी के हाई-एफिशिएंसी सोलर मॉड्यूल बनाती है, जिसमें इनगॉट्स, वेफर्स, सेल्स, मॉड्यूल्स और जरूरी मटेरियल जैसे सोलर ग्लास, एल्यूमिनियम फ्रेम्स और EVA बैकशीट्स शामिल हैं.
सोलर एनर्जी में भारत कहां?
भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2014 में 2.5 GW से बढ़कर 2025 में 140 GW से ज्यादा हो गई है. देश अब इंस्टॉल्ड सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में तीसरे नंबर पर है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर पावर प्रोड्यूसर है. भारत ने पहले ही पेरिस समझौते की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है, जिसमें नॉन-फॉसिल स्रोतों का हिस्सा इंस्टॉल्ड पावर क्षमता में 51.5 प्रतिशत है – जो 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले हासिल हुआ है – और 2030 तक 500 GW तक पहुंचने की राह पर है.
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