यूरोप पर टैरिफ की खुली धमकी
ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिली, तो वह आठ यूरोपीय देशों से आने वाले आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे. योजना के तहत 1 फरवरी से 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून तक समझौता न होने की स्थिति में 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. इस सूची में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं. इस ऐलान ने यूरोपीय सरकारों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों को भी चौंका दिया है.
यूरोपीय प्रतिक्रिया और पलटवार के संकेत
ग्रीनलैंड के समर्थन में इन आठों यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी किया है. वहीं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिकी टैरिफ वाकई लागू होते हैं, तो यूरोपीय संघ जवाबी कार्रवाई कर सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका-यूरोप के बीच व्यापार तनाव फिर से गहराने का खतरा है. पिछली बार ऐसे टकराव ने बाजारों में तेज गिरावट और निवेशकों की घबराहट बढ़ा दी थी.
पिछली टैरिफ उथल-पुथल की याद
अप्रैल 2025 में लगाए गए ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया था. उस समय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. हालांकि साल के दूसरे हिस्से में निवेशकों ने ट्रंप की व्यापारिक धमकियों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था, क्योंकि अमेरिका ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ समेत कई देशों के साथ समझौते कर लिए थे. लेकिन अब ताजा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि वह शांति का दौर खत्म हो सकता है.
बाजारों और मुद्राओं पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, नए सप्ताह की शुरुआत में यूरो पर दबाव बढ़ सकता है. डॉलर के मुकाबले यूरो पहले ही कमजोर स्तरों पर है. हालांकि डॉलर को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन अमेरिका के केंद्र में रहने वाले इन भू-राजनीतिक तनावों का असर उस पर भी पड़ सकता है. यूरोपीय शेयर बाजार फिलहाल रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं, लेकिन टैरिफ विवाद से इनमें सीमित गिरावट की आशंका जताई जा रही है.
डिफेंस शेयर और सुरक्षित निवेश की चमक
भू-राजनीतिक तनाव का एक असर यह भी है कि डिफेंस कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी हुई है. यूरोप में रक्षा से जुड़े शेयर इस महीने करीब 15 प्रतिशत चढ़ चुके हैं. इसके अलावा सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में भी मजबूती दिख रही है. विश्लेषकों का कहना है कि जोखिम बढ़ने पर निवेशक शेयरों से निकलकर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, और यही रुझान फिलहाल नजर आ रहा है.
जोखिमों के आदी होते निवेशक
हालांकि हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन बाजारों में घबराहट सीमित दिख रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशक अब भू-राजनीतिक जोखिमों के आदी हो चुके हैं. कई निवेशक यह भी मानते हैं कि ट्रंप की सभी धमकियां अमल में नहीं आएंगी. इसी वजह से बाजारों की प्रतिक्रिया पहले जैसी तीखी नहीं है. फिर भी, अगर टैरिफ वास्तव में लागू होते हैं, तो आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का रुझान और मजबूत हो सकता है.
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