क्रंचबेस के आंकड़ों के अनुसार, 14 दिसंबर 2025 तक एआई स्टार्टअप्स ने कुल 202.3 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल की. अगर इसकी तुलना 2021 से करें, जब यह आंकड़ा महज 97 अरब डॉलर था, तो पिछले चार सालों में इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि 2025 वह साल बन गया है, जिसमें एआई स्टार्टअप्स को मिली फंडिंग और अन्य सभी क्षेत्रों को मिली फंडिंग लगभग बराबर (202 अरब डॉलर बनाम 203 अरब डॉलर) पहुंच गई है.
किस कंपनी ने कहां किया सबसे बड़ा निवेश?
इस साल के निवेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुछ बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स ने बाजार में अपनी धाक जमाई है-
- सॉफ्टबैंक (SoftBank) और ओपनएआई (OpenAI): जापान की दिग्गज निवेशक कंपनी सॉफ्टबैंक ने साल 2025 की सबसे बड़ी डील करते हुए ओपनएआई (OpenAI) में अकेले 40 अरब डॉलर का निवेश किया है. इस निवेश के साथ ओपनएआई दुनिया की सबसे मूल्यवान प्राइवेट कंपनी बन गई है, जिसकी वैल्यूएशन 500 अरब डॉलर तक पहुंच गई है.
- एनवीडिया (Nvidia): एआई चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया भी पीछे नहीं है. एनवीडिया ने एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. कंपनी ने ओपनएआई में करीब 100 अरब डॉलर की कमिटमेंट जताई है, जिसे किस्तों में दिया जा रहा है. इसके अलावा, एनवीडिया ने एलन मस्क की कंपनी xAI में भी निवेश किया है, जिसने अक्टूबर 2025 में 20 अरब डॉलर का बड़ा फंड जुटाया.
- एंथ्रोपिक (Anthropic): एआई मॉडल बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने भी इस साल निवेशकों का ध्यान खींचा और लगभग 13 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई. यह कंपनी अब 183 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के साथ दुनिया की चौथी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है.
भारत में रिलायंस की एआई ‘जियो मोमेंट’ की तैयारी
भारत के संदर्भ में देखें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एआई क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी घोषणा की है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अंबानी ने वादा किया है कि रिलायंस और जियो मिलकर अगले सात वर्षों में भारत के एआई इकोसिस्टम पर 10 लाख करोड़ रुपये (करीब 110 अरब डॉलर) का निवेश करेंगे.
मुकेश अंबानी के मुताबिक, रिलायंस का लक्ष्य भारत को एआई की दुनिया में आत्मनिर्भर बनाना है. कंपनी गुजरात के जामनगर में ‘गीगावॉट-स्केल’ के डेटा सेंटर बना रही है, जिसका पहला चरण (120 मेगावॉट) 2026 की दूसरी छमाही तक चालू हो जाएगा. यह निवेश केवल कंपनी के मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि भारत की अपनी ‘सॉवरेन कंप्यूट’ क्षमता तैयार करने के लिए है.
भविष्य की राह
एआई फंडिंग का यह बढ़ता ग्राफ केवल शुरुआत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में भी यह रफ्तार जारी रहेगी. 2025 में मिली कुल फंडिंग का 58 प्रतिशत हिस्सा ‘मेगा-राउंड्स’ (500 मिलियन डॉलर से अधिक के निवेश) के जरिए आया है, जो बताता है कि निवेशक अब बड़ी और स्थापित एआई कंपनियों पर भारी दांव लगा रहे हैं. जैसे-जैसे रिलायंस जैसी कंपनियां बुनियादी ढांचा तैयार करेंगी, एआई की लागत कम होगी और यह सामान्य नागरिकों तक और भी आसान तरीके से पहुंचेगी.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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