म्यूचुअल फंड निवेश की दुनिया में मुनाफे को नापने के तीन मुख्य तरीके होते है- एब्सलूट रिटर्न, सीएजीआर और एक्सआईआरआर. एक्सपर्ट का मानना है कि इन तीनों का अंतर समझे बिना आप अपने निवेश का सही आकलन नहीं कर सकते.
1. एब्सलूट रिटर्न: कुल कितना बढ़ा पैसा?
यह सबसे सरल तरीका है. इसमें बस यह देखा जाता है कि आपने कितना लगाया और आज वह कितना हो गया है. उदाहरण के लिए अगर आपने 1 लाख रुपये लगाए और 5 साल बाद वह 1.75 लाख रुपये हो गए, तो आपका एब्सलूट रिटर्न 75% है. यह तरीका एक साल से कम समय के निवेश के लिए ठीक है, लेकिन लंबे समय के लिए यह गुमराह करने वाला हो सकता है.
2. सीएजीआर: सलाना औसत रफ्तार
अगर आपने एकमुश्त पैसा निवेश किया है, तो कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट यानी सीएजीआर आपके लिए सबसे बेस्ट है. यह बताता है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद आपके पैसे ने हर साल औसतन किस रफ्तार से प्रगति की. उदाहरण के लिए, ऊपर दिए गए 1 लाख रुपये के उदाहरण में 75 फीसदी का कुल मुनाफा असल में हर साल लगभग 11.8 फीसदी की सालाना बढ़त (सीएजीआर) के बराबर है.
3. एक्सआईआईआर: एसआईपी वालों के लिए जरूरी
ज्यादातर लोग म्यूच्यूअल फंड में हर महीने एसआईपी के जरिए पैसा लगाते हैं. चूंकि एसआईपी में पैसा अलग-अलग तारीखों पर निवेश होता है, इसलिए वहां सीएजीआर काम नहीं करता. वहां काम आता है एक्सटेंडेड इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न यानी एक्सआईआईआर. आपकी हर किस्त की तारीख और उस पर मिले समय के हिसाब से सटीक रिटर्न बताता है.
एक्सपर्ट की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ बड़े दिखने वाले रिटर्न पर ध्यान नहीं देना चाहिए. सही तरीका यह है कि लंपसम निवेश के लिए सीएजीआर, एसआईपी के लिए एक्सआईआईआर और छोटे समय की झलक देखने के लिए एब्सलूट रिटर्न का इस्तेमाल किया जाए. सही जानकारी के साथ रिटर्न को समझना ही समझदारी भरा निवेश माना जाता है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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