पिछले कुछ वर्षों में बहुत से इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बिटकॉइन को ‘डिजिटल गोल्ड’ मान रहे थे. यानी संकट में यह सोने की तरह काम करेगा.लेकिन, उनके दावे बस दावे ही साबित हुए हैं हकीकत नहीं. इस साल अब तक बिटकॉइन 26 फीसदी टूट चुकी है और बाजार पंडित इसके 50 हजार डॉलर तक गिरने की भविष्वाणी कर रहे हैं.
बिटकॉइन की इस ताजा शामत के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ऐलान है.
बिटकॉइन की इस ताजा शामत के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक ऐलान है. ट्रंप ने जैसे ही वैश्विक टैरिफ को 10 फीसदी 15% तक बढ़ाने का बिगुल फूंका, क्रिप्टो मार्केट में भगदड़ मच गई. मजे की बात देखिए, जब एशियाई शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे तब बिटकॉइन बुरी तरह पीटी रही थी. सिर्फ टैरिफ ही नहीं, मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका ने भी बिटकॉइन की सांसें फुला दी हैं. ईरान के पास अमेरिकी सेना की बढ़ती हलचल और ट्रंप का वह बयान, जिसमें उन्होंने अगले 10 दिनों में ईरान पर हमले का फैसला लेने की बात कही है, ने बाजार को हिला दिया है. जब दुनिया पर युद्ध का साया मंडराता है तो निवेशक ‘रिस्की’ एसेट से तौबा कर लेते हैं. बिटकॉइन की गिनती भी जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों में होती है.
क्या बिटकॉइन और गिरेगी?
सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट के पंडितों की मानें तो यह तो बस ट्रेलर है. 10xरिसर्च के मार्कस थिएलन का कहना है कि यह एक क्लासिक ‘बेयर मार्केट’ है. उन्होंने डराने वाली भविष्यवाणी की है कि बिटकॉइन अभी $50,000 तक और गिर सकता है. निवेशकों का भरोसा डगमगा चुका है और लिक्विडिटी सूख रही है. बीटीएसई के सीओओ जेफ मेई के मुताबिक, टैरिफ दरों में इस अचानक बढ़ोतरी ने निवेशकों को इतना डरा दिया है कि वे अपनी क्रिप्टो परिसंपत्तियां कौड़ियों के भाव बेचकर भाग रहे हैं.
सोने के सामने फीकी पड़ी बिटकॉइन
पिछले कुछ वर्षों में बहुत से इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बिटकॉइन को ‘डिजिटल गोल्ड’ मान रहे थे. यानी संकट में यह सोने की तरह काम करेगा. लेकिन, उनके दावे अब हवा हो गए हैं. वैश्विक तनाव से एक तरफ बिटकॉइन औंधे मुंह गिरा तो दूसरी तरफ सोना ‘चमक’ रहा है. क्रिप्टो समर्थक भले ही कुछ भी दावा करें लेकिन निवेशकों ने साफ कर दिया कि जब जान पर बन आती है, तो वे असली पीली धातु पर ही भरोसा करते हैं, कंप्यूटर कोड पर नहीं.
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