आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ओर से हरियाणा सरकार के खाते में हुई धोखाधड़ी पर रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी चुप्पी तोड़ी और इसे व्यक्तिगत स्तर पर की गई हेराफेरी बताया. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस धोखाधड़ी में कोई सिस्टम की खामी नहीं है, बल्कि यह कुछ कर्मचारियों और समूह की मिलीभगत का नतीजा है.
आरबीआई गर्वनर संजय मल्होत्रा ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की धोखाधड़ी को कर्मचारियों की मिलीभगत बताया है.
इससे पहले, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. वैद्यनाथन ने कहा था कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिये हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया. यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था. यह किसी प्रणालीगत ‘रिपोर्टिंग’ त्रुटि का मामला नहीं है.
बैंक के मुनाफे पर असर नहीं
शेयर बाजार खुलने से पहले निवेशकों एवं विश्लेषकों के लिए आयोजित विशेष ‘कॉन्फ्रेंस कॉल’ में वैद्यनाथन ने कहा कि धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप और किसी भी तरह के दबाव को पहले से ही पहचानने की अपनी नीतियों के अनुरूप बैंक कुछ प्रावधान करेगा. उन्होंने कहा कि इससे मुनाफे पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है. उच्च शुद्ध ब्याज मुनाफा और ऋण लागत में सुधार से मदद मिलेगी. स्वतंत्र आधार पर हम लाभप्रदता के लिहाज से चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे.
हरियाणा सरकार ने दो बैंकों से करार तोड़ा
हरियाणा सरकार ने कथित धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनजर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ-साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भी सरकारी कार्यों के लिए अपनी समिति से बाहर (डी-एम्पैनल्ड) कर दिया है. हालांकि, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने कथित तौर पर धोखाधड़ी से खाते खोलने के मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है. वैद्यनाथन ने बताया कि सलाहकार कंपनी केपीएमजी द्वारा किया जा रहा स्वतंत्र ‘फोरेंसिक ऑडिट’ चार से पांच सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद है. हमने केपीएमजी को नियुक्त किया है और पूरी प्रक्रिया में चार-पांच सप्ताह लेती हैं.
खाते के मिलान से पकड़ी धोखाधड़ी
प्रबंध निदेशक ने कहा कि बैंक ने करीब 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आकलन किया है, जिसमें 490 करोड़ रुपये मिलान (रिकंसिलिएशन) के बाद पहचाने गए और अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये आंतरिक जांच के दौरान स्वयं चिन्हित किए गए. उन्होंने संकेत दिया कि यह राशि आगे बढ़ने के आसार नहीं है. यह आंकड़ा वर्तमान आकलन के आधार पर जारी किया है. वसूली और 35 करोड़ रुपये का कर्मचारी बेईमानी बीमा कवर, बैंक पर प्रभाव को कम कर सकता है. इस प्रकरण को जाली भौतिक चेक लेनदेन के जरिये कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत का मामला बताते हुए कहा कि यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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