मौजूदा समय में क्या है जरूरत?
भारत के पड़ोसी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरण और हालिया घटनाक्रमों के बाद विशेषज्ञ रक्षा पूंजीगत व्यय बढ़ाने की जोरदार वकालत कर रहे हैं. स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. केंद्रीय बजट 2025-26 में रक्षा मंत्रालय के लिए रिकॉर्ड 6.81 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष से 9.53% अधिक है. इसमें से 1.80 लाख करोड़ रुपये सशस्त्र बलों के पूंजीगत खर्च के लिए और 1.12 लाख करोड़ रुपये घरेलू उद्योग से खरीद के लिए आरक्षित हैं. स्वदेशीकरण पर यह जोर पहले ही ठोस परिणाम देने लगा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक FY 2023-24 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1,27,434 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये की तुलना में 174% की वृद्धि है.
भारत एयर डिफेंस सिस्टम को डेवलप करने पर जोर दे रहा है. मिशन सुदर्शन चक्र को इसी उद्देश्य से लॉन्च किया गया है. (फाइल फोटो/Reuters)
डिफेंस R&D पर खर्च
भारत की रक्षा नीति में अब पारंपरिक हथियार प्रणालियों के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास (R&D), इनोवेशन और भविष्य की युद्ध क्षमताओं पर जोर तेजी से बढ़ रहा है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में साइबर वॉर, स्पेस एसेट्स, मानव रहित प्रणालियां (Unmanned System) और डेटा आधारित मिलिट्री ऑपरेशन आधुनिक संघर्षों का चेहरा तय करेंगे. इसी दिशा में 2025-26 के बजट में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को 26,816.82 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.4 प्रतिशत अधिक है. इसमें बड़ी हिस्सेदारी पूंजीगत व्यय और निजी क्षेत्र के साथ सहयोगी परियोजनाओं के लिए रखी गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में रक्षा बजट में होने वाली वृद्धि का बड़ा हिस्सा केवल पारंपरिक प्लेटफॉर्म के बजाय इनोवेशन और उभरती तकनीकों पर खर्च किया जाना चाहिए. इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी बनने का अवसर भी मिलेगा. स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मजबूती का असर अब निर्यात टोकरी में भी दिख रहा है, जिसमें बुलेटप्रूफ जैकेट, गश्ती नौकाएं, हेलीकॉप्टर, रडार और हल्के टॉरपीडो जैसे उत्पाद शामिल हैं. तेजस लड़ाकू विमान जैसे कार्यक्रम भी मैच्योर हो रहे हैं.

रक्षा बजट से 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद की राह खुल सकती है. (फाइल फोटो/AP)
डिफेंस एक्सपोर्ट
डिफेंस एक्सपोर्ट के मोर्चे पर भारत ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय छलांग लगाई है. वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 21,083 करोड़ रुपये की तुलना में 12.04 प्रतिशत अधिक है. इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 15,233 करोड़ रुपये रही, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) का योगदान 8,389 करोड़ रुपये रहा. भारत ने 2024-25 के दौरान लगभग 80 देशों को गोला-बारूद, हथियारों से लेकर संपूर्ण प्रणालियां और अहम सब-सिस्टस सप्लाई की थीं. अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देशों को निर्यात बढ़ना भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है. खास बात यह रही कि DPSU निर्यात में साल-दर-साल 42.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में इनके बढ़ते इंटीग्रेशन को दर्शाती है. सरकार ने 2029 तक रक्षा विनिर्माण में 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात में 50,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य तय किए हैं.
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