सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में सड़कें बनाना पहले सिर्फ रणनीतिक जरूरत माना जाता था, लेकिन अब इन सड़कों का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन की परियोजनाओं से दूरदराज के गांवों तक पहुंच आसान हुई है और पर्यटन को नया सहारा मिला है. नई सड़कों और पुलों के कारण लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है. इससे स्थानीय लोगों को गाइडिंग, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट और छोटे कारोबारों के जरिए रोजगार के नए अवसर मिले हैं.
बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन अब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में 62214 किलोमीटर सड़कें, 1005 पुल, 7 सुरंगें और 21 हवाई पट्टियां बना चुका है.
7 दिसंबर 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के 125 प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए थे. इनमें 28 सड़कें, 93 पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल थे जिनकी कुल लागत करीब 5000 करोड़ रुपये रही. ये प्रोजेक्ट्स लद्दाख, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम जैसे सीमावर्ती राज्यों में बनाए गए हैं. रक्षा मंत्री के मुताबिक इन परियोजनाओं से सेना की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, साथ ही पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़ते गांव
सीमावर्ती इलाकों को विकसित करने के लिए चलाए जा रहे वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत भी सड़क निर्माण को तेजी दी गई है. इस कार्यक्रम के तहत 112 सड़कें और 35 लोहे के पुल बनाए गए हैं जिनकी लागत लगभग 2513 करोड़ रुपये रही. इन प्रोजेक्ट्स की वजह से अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के 135 ऐसे गांव मुख्य सड़कों से जुड़े हैं जो पहले कनेक्टिविटी से लगभग कटे हुए थे. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से इन इलाकों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने लगी हैं और स्थानीय बाजार भी सक्रिय हुए हैं.
लद्दाख में पर्यटन को मिला नया सहारा
लद्दाख में बनी नई सड़कों का असर सबसे साफ दिखाई देता है. कई अहम सड़कों और पुलों के बनने से पांगोंग झील, चुशुल और त्सो मोरीरी जैसे दूरदराज के पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले के मुकाबले काफी आसान हो गई है. आसान पहुंच के कारण यहां एडवेंचर पर्यटन और प्रकृति आधारित पर्यटन में तेजी आई है. इससे स्थानीय लोगों को होमस्टे चलाने, पर्यटक गाइड बनने, टैक्सी सेवा देने और छोटे कारोबार शुरू करने के अवसर मिले हैं. पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख में पर्यटकों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
पर्यटन से बढ़ा स्थानीय रोजगार
सड़क निर्माण के दौरान भी स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को काम मिला. वर्ष 2024 से 2025 के दौरान बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने करीब 16690 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे स्थानीय श्रमिकों और सामग्री के इस्तेमाल के जरिए रोजगार के अवसर पैदा हुए. सड़क बनने के बाद पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से होटलों, होमस्टे, परिवहन सेवाओं और दुकानों में भी काम के नए अवसर बने हैं. खासकर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है.
सीमावर्ती इलाकों में बदल रही है तस्वीर
बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन अब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में 62214 किलोमीटर सड़कें, 1005 पुल, 7 सुरंगें और 21 हवाई पट्टियां बना चुका है. बेहतर कनेक्टिविटी के कारण न सिर्फ पर्यटन बढ़ रहा है बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और स्थानीय व्यापार भी मजबूत हो रहे हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो सीमा क्षेत्रों में बन रही सड़कें सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि स्थानीय विकास और पर्यटन को भी नई गति दे रही हैं.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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