भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार को रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे गिरकर 92.25 के स्तर पर पहुंच गया.
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
क्यों गिर रहा है रुपया?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण हैं:
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़कर 97.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है. ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है और इसका सीधा असर रुपये की मजबूती पर पड़ता है.
- विदेशी निवेशकों की निकासी: फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला है. गुरुवार को ही निवेशकों ने करीब 7,049 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
- शेयर बाजार में गिरावट: घरेलू शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट ने भी रुपये की सेहत बिगाड़ दी. गुरुवार (12 मार्च) को सेंसेक्स 829.29 अंक यानी 1.08 फीसदी की गिरावट के साथ 76,034.42 के लेवल पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 227.70 अंक यानी 0.95 फीसदी की गिरावट के साथ 23,639.15 के लेवल पर बंद हुआ.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
जब रुपया कमजोर होता है और डॉलर मजबूत, तो विदेश से आने वाली चीजें महंगी हो जाती हैं. इससे आयात महंगा होता है, जिसका सीधा असर मोबाइल, गैजेट्स और कच्चे तेल के जरिए माल ढुलाई पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है.
आगे कैसी रह सकती है चाल
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्लोबल टेंशन के चलते रुपये पर दबाव बना रह सकता है. अनुमान है कि आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपया 91.70 से 92.40 के दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि, आरबीआई (RBI) स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है.
About the Author

प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.