यह फैसला छोटे-मझोले किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर बाजार में अच्छी कीमत वाली फसलों की खेती से उनकी कमाई स्थायी रूप से बढ़ सकेगी.
कई फसलों को मिलेगा बढ़ावा
बजट में तटीय इलाकों में नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को बढ़ावा देने की बड़ी योजना बनाई गई है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है और यहां करीब 3 करोड़ लोग, जिनमें 1 करोड़ किसान शामिल हैं, नारियल से अपना गुजारा चलाते हैं. सरकार ने नारियल संवर्धन योजना शुरू करने का ऐलान किया है.
इसमें पुराने और कम पैदा करने वाले पेड़ों को नए सैपलिंग, पौधों या बेहतर किस्मों से बदलने जैसे कदम उठाए जाएंगे. इससे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ेगी.
काजू और कोको पर भी फोकस
साथ ही काजू और कोको के लिए अलग से समर्पित कार्यक्रम लाया जा रहा है. इसका मकसद भारत को कच्चे काजू और कोको में आत्मनिर्भर बनाना, प्रसंस्करण बढ़ाना, निर्यात को मजबूत करना और 2030 तक भारतीय काजू व कोको को दुनिया में प्रीमियम ब्रांड बनाना है.
चंदन से लेकर अखरोट तक की खेती को मिली मजबूत
चंदन की खेती को भी बहाल करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्रित खेती और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग पर काम होगा. पहाड़ी और हिली इलाकों में अखरोट, बादाम और पाइन नट्स जैसी पौष्टिक और महंगी नट्स की खेती को सपोर्ट मिलेगा. पुराने बागानों को फिर से हरा-भरा बनाने और हाई-डेंसिटी खेती फैलाने के लिए अलग कार्यक्रम होगा. इसमें युवाओं को जोड़कर वैल्यू एडिशन यानी मूल्यवर्धन पर फोकस रहेगा, ताकि किसानों को ज्यादा मुनाफा मिले. पूर्वोत्तर में अगर वृक्षों को भी बढ़ावा दिया जाएगा. ये सारी पहलें किसानों को स्मार्ट और लाभकारी खेती की तरफ ले जाएंगी.
सिंचाई पर भी ध्यान
सिंचाई पर भी ध्यान दिया गया है, क्योंकि अच्छी सिंचाई के बिना उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती मुश्किल होती है. सरकार पहले से ही पीएम कृषि सिंचाई योजना चला रही है और इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से पानी की उपलब्धता बढ़ेगी. इससे फसलें बेहतर होंगी और सूखे या बाढ़ का खतरा कम होगा.
ये घोषणाएं किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को करीब ला रही हैं. छोटे किसान जो अब तक सिर्फ अनाज या सब्जियां उगाते थे, वे अब हाई-वैल्यू क्रॉप्स में जा सकेंगे. इससे ग्रामीण रोजगार बढ़ेगा, निर्यात बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. किसान भाई-बहन अब उम्मीद से भरे हैं कि ये योजनाएं जल्द जमीन पर उतरेंगी और उनकी मेहनत का सही फल मिलेगा. बजट में कृषि को विकास का इंजन बनाने का संकेत साफ है.
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