बाजार जानकारों का कहना है कि जोखिम से बचने की प्रवृत्ति, भारी लिक्विडेशन, टेक शेयरों में कमजोरी और अमेरिका की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं ने क्रिप्टो निवेशकों को हिला दिया. कॉइनग्लास के आंकड़ों के मुताबिक, केवल 24 घंटों में करीब $1 बिलियन के बिटकॉइन पोजीशन जबरन बंद कर दिए गए, क्योंकि लीवरेज लेकर ट्रेड करने वाले निवेशकों को कीमत गिरने पर बाहर होना पड़ा. जैसे ही लिक्विडेशन स्तर टूटे, बिकवाली तेज हो गई और पूरे क्रिप्टो बाजार में डोमिनो प्रभाव दिखा.
सोना-चांदी की गिरावट का असर
क्रिप्टो बाजार ऐसे समय दबाव में आए जब वैश्विक निवेशक पहले ही जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बना रहे थे. कीमती धातुओं में अस्थिरता और टेक शेयरों में व्यापक बिकवाली ने माहौल और खराब किया. चांदी एक ही सत्र में 18% तक गिर गई, जबकि सोने में भी लीवरेज और सट्टा सौदों के खुलने से अस्थिरता बढ़ी. शेयर बाजार में S&P 500 सात हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक दो महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर फिसल गया.
कैपिटुलेशन मोड में क्रिप्टो बाजार
कॉइन ब्यूरो के सह-संस्थापक और निवेश विश्लेषक निक पकरिन ने कहा, “यह साफ है कि क्रिप्टो बाजार अब पूरी तरह कैपिटुलेशन मोड में है. अगर पिछले सर्कल्स को देखें तो यह अब छोटी अवधि का सुधार नहीं, बल्कि वितरण चरण से रीसेट की ओर संक्रमण है, जो हफ्तों नहीं बल्कि महीनों तक चलता है.” क्रिप्टो में आई गिरावट का एक और बड़ा कारण अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती चिंता रही.
बाजार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व के अगले चेयर के रूप में चुनने के फैसले से घबरा गए. विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि वॉर्श सख्त (हॉकिश) रुख अपना सकते हैं, जिसमें फेड की बैलेंस शीट को घटाना भी शामिल है. ऐतिहासिक रूप से क्रिप्टोकरेंसी को भरपूर लिक्विडिटी और कम ब्याज दरों से फायदा होता है. जूलियस बेयर के मैनुएल विलगेज फ्रांसेची ने कहा, “बाजार को लगता है कि वे सख्त नीति अपनाएंगे. छोटी बैलेंस शीट क्रिप्टो के लिए किसी भी तरह का सहारा नहीं देगी.”
संस्थागत निवेशक बने बिकवाल
दैनिक कीमतों के उतार-चढ़ाव से परे, संस्थागत निवेशकों द्वारा क्रिप्टो उत्पादों से पैसा निकालने का दबाव भी बना हुआ है. डॉयचे बैंक के विश्लेषकों ने कहा कि व्यापक गिरावट का कारण संस्थागत एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से लगातार निकासी है. उनका मानना है कि क्रिप्टो में यह व्यापक गिरावट मुख्य रूप से संस्थागत ETFs से भारी निकासी के कारण है. अक्टूबर 2025 की गिरावट के बाद से हर महीने अरबों डॉलर निकाले जा रहे हैं. जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETFs से $3 बिलियन से ज्यादा निकासी हुई, जबकि दिसंबर में लगभग $2 बिलियन और नवंबर में $7 बिलियन की निकासी हुई थी.
टेक सेक्टर की कमजोरी का असर
बिटकॉइन की कीमत अब टेक शेयरों, खासकर AI से जुड़े शेयरों के साथ ज्यादा तालमेल दिखा रही है. इस हफ्ते सॉफ्टवेयर और AI शेयरों में तेज गिरावट से भी क्रिप्टो निवेशकों का हौसला डोला. जैसे-जैसे टेक वैल्यूएशन करेक्शन हुआ, निवेशकों ने डिजिटल संपत्तियों में भी जोखिम घटाया.
विश्लेषक अब चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कीमतें और गिरती हैं तो क्रिप्टो माइनर्स पर दबाव बढ़ सकता है. जेफरीज के रणनीतिकार मोहित कुमार ने कहा, “क्रिप्टो माइनर्स को लेकर चिंता बढ़ रही है. अगर कीमतें और गिरती हैं तो जबरन लिक्विडेशन का खतरा है, जिससे एक दुष्चक्र बन सकता है.”
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