मधुसूदन केला का मानना है कि चूंकि बड़े और परिपक्व सेक्टर अब सूचकांकों (Indices) पर हावी हैं, इसलिए इंडेक्स रिटर्न अब एक सीमित दायरे में सिमट सकता है. ऐसे में निवेशकों को ‘हिडन जेम्स’ (Hidden Gems) यानी उन छिपे हुए शेयरों की तलाश करनी होगी जो ज्यादा चर्चा में नहीं है.
मधुसूदन केला का कहना है कि वोलैटिलिटी दुश्मन नहीं है, यह एंट्री पॉइंट है.
मधुसूदन केला का कहना है कि वोलैटिलिटी दुश्मन नहीं है, यह एंट्री पॉइंट है. उनके मुताबिक, जब बाजार में ‘शोर’ (Noise) बढ़ता है, तभी समझदार निवेशकों के लिए अवसर पैदा होते हैं. भीड़ के साथ चलकर कभी भी बड़ा पैसा नहीं बनाया जा सकता. पैसा बनाने के लिए शोर के बीच छिपे संकेतों को पहचानना जरूरी है.
‘हिडन जेम्स’ की करें तलाश
मधुसूदन केला का मानना है कि चूंकि बड़े और परिपक्व सेक्टर अब सूचकांकों (Indices) पर हावी हैं, इसलिए इंडेक्स रिटर्न अब एक सीमित दायरे में सिमट सकता है. ऐसे में निवेशकों को ‘हिडन जेम्स’ (Hidden Gems) यानी उन छिपे हुए शेयरों की तलाश करनी होगी जो ज्यादा चर्चा में नहीं है. केला का कहना है कि उनका जोर अब उन कंपनियों पर है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपनी उत्पादकता बढ़ाने और मार्जिन सुधारने के लिए कर रही हैं.
प्रमोटर की काबिलियत सबसे ऊपर
केला की निवेश रणनीति का एक बड़ा हिस्सा ‘जॉकी’ यानी कंपनी चलाने वाले प्रमोटर या नेतृत्वकर्ता पर निर्भर करता है. उनका कहा है, “क्या मैं ऐसे व्यक्ति की पहचान कर पा रहा हूं जो व्यवसाय को आगे बढ़ा सके और लक्ष्य से भटके नहीं?” उनके लिए व्यवसाय के मॉडल से ज्यादा महत्वपूर्ण वह व्यक्ति है जो उस मॉडल को लागू कर रहा है. एक मजबूत उद्यमी ही कठिन समय में कंपनी को बाहर निकाल सकता है और लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का लाभ दिला सकता है.
बुल रन के असली ‘सुपरहीरो’ हैं रिटेल निवेशक
भारतीय बाजार की मजबूती का श्रेय केला ने देश के खुदरा निवेशकों को दिया है. उन्होंने कहा कि जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI) रिकॉर्ड बिकवाली कर रहे थे, तब भी भारतीय रिटेल निवेशकों ने सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए बाजार को गिरने नहीं दिया. आज करीब 13 करोड़ भारतीय शेयर बाजार को एक सट्टेबाजी के बजाय ‘एसेट क्लास’ के रूप में देख रहे हैं. यह भारतीय बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव है, जो बाजार को वैश्विक झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है.
₹11,000 से ₹100 करोड़ तक का सफर
दीर्घकालिक निवेश की ताकत को समझाते हुए केला ने एक चौंकाने वाला उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि यदि कोई निवेशक 50 वर्षों तक अनुशासित रहकर हर महीने ₹11,000 म्यूचुअल फंड में निवेश करता है तो ऐतिहासिक रिटर्न के आधार पर यह राशि ₹100 करोड़ तक पहुंच सकती है. उनका कहना है कि बाजार की छोटी-मोटी हलचलों के पीछे भागने के बजाय अनुशासन बनाए रखें और कंपाउंडिंग को अपना काम करने दें.
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