भारतीय रेलवे ने 2026 तक बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है. पहला फोकस ट्रेनों और खासकर जनरल कोच की सफाई पर है. तकनीक और AI की मदद से निगरानी कर व्यवस्था को सख्त बनाया जाएगा.
र कोच चमकेगा, जनरल भी नहीं रहेगा पीछे; रेलवे का मेगा क्लीनिंग ड्राइव. (Image:AI)
हर कोच की सफाई पर विशेष फोकस
पहले रिफॉर्म के तहत ट्रेनों के सभी कोचों में व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा. खास बात यह है कि अब जनरल कोच की सफाई भी यात्रा के दौरान सुनिश्चित की जाएगी. अगर जनरल कोच किसी कारण से सिस्टम से कनेक्ट नहीं होगा तो स्टाफ स्टेशन पर उतरकर उसकी सफाई करेगा. हर जोन में 4 से 5 ट्रेनों को शुरुआत में शामिल किया गया है, जिसके बाद 80 ट्रेनों को चिन्हित कर इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा. टॉयलेट में गार्बेज बिन, मैकेनिकल खामियों की जांच और पीक ऑवर में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी.
तकनीक और AI से होगी निगरानी
सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए इंटीग्रेटेड सिस्टम लगाया जाएगा. AI आधारित तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जिससे यह जांचा जाएगा कि सफाई मानकों के अनुसार हुई या नहीं. अगर किसी वेंडर की सफाई खराब पाई गई तो उस पर कार्रवाई होगी. जिनका काम बेहतर रहेगा, उन्हें ही आगे कॉन्ट्रैक्ट दिया जाएगा. रूट आधारित टीमें काम करेंगी ताकि हर ट्रेन में नियमित निगरानी बनी रहे और यात्रियों को साफ-सुथरा माहौल मिले.
कार्गो सेक्टर में भी बड़ी छलांग
दूसरा बड़ा रिफॉर्म गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल से जुड़ा है. पिछले तीन वर्षों में देश में 124 कार्गो टर्मिनल तैयार हो चुके हैं, जिनसे करीब 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है. आने वाले पांच साल में 500 से ज्यादा गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे माल ढुलाई तेज होगी, उद्योगों को फायदा मिलेगा और रेलवे की आय में बड़ा इजाफा होगा. रेलवे का यह रिफॉर्म प्लान यात्रियों और व्यापार दोनों के लिए नई दिशा तय करता दिख रहा है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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