दिग्गज अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने राज्यों को सुझाव दिया है कि उन्हें बड़े किसानों से टैक्स वसूलना चाहिए. राज्यों को इस पैसे में केंद्र को हिस्सेदारी देने की भी जरूरत नहीं है. अभी खेती-किसानी से होने वाली कमाई को पूरी तरह टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है.
बड़े किसानों पर टैक्स लगाने की तैयारी है.
16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर पुराने योजना आयोग के वाइस चेयरमैन रह चुके अहलूवालिया ने कहा कि राज्य विविधीकृत कृषि पर कराधान से प्राप्त राजस्व पूरी तरह अपने पास रख सकते हैं. इसे केंद्र के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी. उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि संपूर्ण कृषि पर केंद्र कर नहीं लगा सकता और केवल राज्य ही कर लगा सकते हैं. क्या यह मान लिया जाए कि कृषि को हमेशा के लिए आयकर से मुक्त रखा जाना चाहिए, चाहे खेत का आकार कुछ भी हो? इसका बचाव करना बहुत कठिन है.
कैसे किसानों पर लगेगा टैक्स
अहलूवालिया ने कहा कि यदि आपके पास विविध तरह के मध्यम आकार के खेत हैं तो आप निश्चित तौर पर पर्याप्त उच्च आय उत्पन्न कर सकते हैं. आयकर की श्रेणी में आ सकते हैं. वह कर 100 प्रतिशत राज्यों को मिलेगा. उसे केंद्र द्वारा नहीं लिया जाएगा. इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी राज्य सरकार को नीचे के स्तरों पर संसाधनों का हस्तांतरण करने से रोकता हो, यदि वह ऐसा करना चाहे. हालांकि प्राय: दबाव केंद्र सरकार की ओर निर्देशित किया जाता है.
राज्यों के पास अपने कई अधिकार
अहलूवालिया ने कहा कि यदि किसी राज्य का मुख्यमंत्री वैश्विक मानकों को प्राप्त करने के लिए राजनीतिक निर्णय के रूप में सरकार के तीसरे स्तर यानी स्थानीय निकायों को धन हस्तांतरित और विकेंद्रीकृत करने का निर्णय लेता है, तो उसे केंद्र की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है. अर्थशास्त्री ने यह भी कहा कि अधिकतर देशों में मानव पूंजी, जिसमें बाल स्वास्थ्य, मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा और संबंधित क्षेत्र शामिल है. राष्ट्रीय स्तर की तुलना में सरकार के निचले स्तरों से अधिक जुड़ी हुई है. भारतीय राज्यों में मौजूद असमानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि दक्षिणी राज्यों ने उल्लेखनीय रूप से कम प्रजनन दर से जनसंख्या वृद्धि में काफी कमी की है.
अभी क्या है टैक्स की व्यवस्था
इनकम टैक्स कानून के तहत अभी देश में खेती से होने वाली 100 फीसदी कमाई को टैक्स फ्री रखा गया है. किसान चाहे छोटा हो या बड़ा, एक बीघ खेत हो या फिर हजारों एकड़ की खेती. सभी एग्री प्रोडक्ट को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है. अर्थशास्त्री अहलूवालिया ने इसी बात की ओर इशारा किया है और कहा है कि भले ही किसान कितना भी बड़ा क्यों न हो, उससे टैक्स नहीं लिया जाना सही नहीं है. राज्यों को बड़े किसानों की कमाई पर टैक्स लगाना चाहिए.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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