रसोई के बजट से परेशान गृहिणियों और आम आदमी के लिए केंद्र सरकार ने राहत का पिटारा खोल दिया है. खाने के तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर आयात शुल्क (Import Duty) को आधा करने का फैसला लिया है.
अब तक कच्चे पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर 20% आयात शुल्क वसूला जा रहा था, जिसे अब सरकार ने घटाकर सीधा 10% कर दिया है. चूंकि भारत अपनी खाद्य तेलों की जरूरत का लगभग 70% हिस्सा दूसरे देशों से खरीदकर पूरा करता है, इसलिए टैक्स में हुई यह 10% की कटौती सीधे तौर पर घरेलू बाजार में तेल की बोतलों और पैकेटों के दाम नीचे ले आएगी.

आपको बता दें कि सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, ये नई और घटी हुई दरें 31 मई से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगी. इसका मतलब है कि जून की शुरुआत से ही बाजार में नई खेप आने के साथ तेल की कीमतों में नरमी दिखने लगेगी.

दुनिया भर से आने वाले तेल पर निर्भरता को देखते हुए यह फैसला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. भारत पाम ऑयल के लिए मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों पर निर्भर है, जबकि सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस जैसे देशों से आता है. सितंबर 2024 में जब सरकार ने टैक्स बढ़ाया था, तब तेल के दाम अचानक आसमान छूने लगे थे.
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सरकार सिर्फ टैक्स घटाकर शांत नहीं बैठी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इस कटौती का फायदा सीधे आपकी जेब तक पहुंचे. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए सख्त निगरानी शुरू कर दी है. अधिकारियों की टीमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में रिफाइनरी और प्रोसेसिंग प्लांट्स का लगातार दौरा कर रही हैं.

कई बड़ी तेल कंपनियों ने अपने दाम घटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मंत्रालय इस बात की बारीकी से समीक्षा कर रहा है कि पैकेटबंद सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के एमआरपी (MRP) में कितनी कमी आई है. प्रोसेसिंग यूनिट्स ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही कम आयात शुल्क वाली नई खेप बंदरगाहों से कारखानों तक पहुंचेगी, खुदरा कीमतों में एक और दौर की बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी.

पिछले कुछ महीनों से जिस तरह खाद्य तेलों ने रसोई का बजट बिगाड़ा था, उसे देखते हुए यह कदम बाजार में स्थिरता लाने के लिए रामबाण साबित होगा. सरकार का मुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं को हर वर्ग के लिए सस्ता और सुलभ बनाना है. जब तेल सस्ता होगा, तो न केवल घरों में पकवानों की खुशबू बढ़ेगी, बल्कि लोगों की खरीदारी करने की क्षमता में भी सुधार होगा.

कुल मिलाकर देखें तो आने वाले दिन आम आदमी की जेब के लिए बहुत राहत भरे होने वाले हैं. तेल की कीमतों में होने वाली यह कटौती महंगाई के खिलाफ सरकार की एक बड़ी जीत मानी जा रही है. अब उपभोक्ताओं को 31 मई का इंतजार है, जिसके बाद रसोई के तेल का डिब्बा भरना पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो जाएगा.
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