सीतारमण ने कहा कि राज्य एक साथ दोनों बातें नहीं कर सकते. अगर डिविजिबल पूल से मिलने वाला नेट हिस्सा सही से मिल रहा है तो ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू पर बहस करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने दो टूक कहा कि सेस और सरचार्ज संविधान के तहत लगाए जाते हैं और इन्हें डिविजिबल पूल में शामिल नहीं किया जा सकता.
सेस और सरचार्ज पर सरकार का स्टैंड
वित्त मंत्री ने कहा कि सेस और सरचार्ज पूरी तरह संविधान के दायरे में लगाए जाते हैं और सेस का इस्तेमाल तय उद्देश्य के लिए किया जाता है. उन्होंने बताया कि राज्यों को डिविजिबल पूल में वही पैसा मिलता है जो कानूनी रूप से शेयर करने योग्य होता है.
राज्यों का आरोप रहा है कि केंद्र सेस और सरचार्ज बढ़ाकर टैक्स का बड़ा हिस्सा अपने पास रख रहा है जिससे राज्यों को कम पैसा मिलता है. इस मुद्दे पर लंबे समय से केंद्र और राज्यों के बीच टकराव चल रहा है.
कैपिटल एक्सपेंडिचर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस
सीतारमण ने बजट में सार्वजनिक निवेश पर जोर देते हुए कहा कि प्रभावी कैपिटल एक्सपेंडिचर 17.1 लाख करोड़ रुपये होगा जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है. इसमें केंद्र के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिए जाने वाले ग्रांट और ट्रांसफर भी शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को प्राथमिकता दे रही है और राज्यों को इस काम के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय मदद दी जा रही है.
राज्यों को रिकॉर्ड संसाधन ट्रांसफर
वित्त मंत्री के मुताबिक 2026-27 में राज्यों को कुल 25.44 लाख करोड़ रुपये के संसाधन ट्रांसफर किए जाएंगे. यह पिछले साल के बजट अनुमान और पुराने आंकड़ों से ज्यादा है.
उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों की वित्तीय जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है, भले ही केंद्रीय रेवेन्यू पर दबाव हो.
50 साल का ब्याज मुक्त लोन स्कीम बढ़ी
सीतारमण ने बताया कि राज्यों के लिए 50 साल का ब्याज मुक्त लोन स्कीम बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह पैसा राज्यों को कैपिटल एक्सपेंडिचर और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए दिया जाएगा.
सरकार का दावा है कि यह स्कीम राज्यों के लिए बेहद फायदेमंद है क्योंकि उन्हें बिना ब्याज के लंबे समय के लिए फंड मिल रहा है.
डेट टू जीडीपी टार्गेट पर सफाई
वित्त मंत्री ने डेट टू जीडीपी टार्गेट को लेकर कहा कि यह कोई नया लक्ष्य नहीं है. उन्होंने बताया कि 2018 में एफआरबीएम एक्ट में संशोधन के तहत यह पहले से ही शामिल है.
उन्होंने कहा कि सरकार फिस्कल डेफिसिट के साथ साथ डेट टू जीडीपी को भी मॉनिटर करती है ताकि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनी रहे.
कुछ राज्यों में निवेश गिरने का आरोप
सीतारमण ने निवेश को लेकर राजनीतिक बयान भी दिया. उन्होंने कहा कि केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन घट रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों ने इंडस्ट्री निवेश आकर्षित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं.
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