आम जनता और क्रिएटर्स के मन में इस बात को लेकर काफी उलझन थी कि क्या हर छोटे-मोटे AI इस्तेमाल पर भी ‘AI जनरेटेड’ का लेबल लगाना पड़ेगा. इसी भ्रम को दूर करने के लिए सरकार ने बुधवार को कुछ जरूरी सवाल-जवाब (FAQs) जारी किए हैं. इसमें साफ किया गया है कि अगर आप AI का इस्तेमाल केवल एडिटिंग को बेहतर बनाने या सीखने-सिखाने के लिए कर रहे हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है.
क्या हर AI कंटेंट को ‘फेक’ माना जाएगा?
सरकार ने साफ किया है कि हर वो चीज जिसमें AI की मदद ली गई है, उसे सिंथेटिक कंटेंट (SGI) नहीं माना जाएगा. लेबल केवल उन चीजों पर लगाना होगा जो पूरी तरह से एल्गोरिदम द्वारा बनाई गई हैं या जिनमें किसी असली व्यक्ति या घटना को इस तरह बदला गया है कि वह असली लगने लगे. अगर कंटेंट इतना असली है कि उसे पहचानना मुश्किल हो, तभी वह इस नियम के दायरे में आएगा.
किन कामों को मिली है छूट?
अगर आप अपनी वीडियो की क्वालिटी सुधार रहे हैं या बैकग्राउंड का शोर (नॉइस) कम कर रहे हैं, तो इसे AI जनरेटेड नहीं माना जाएगा. इसके अलावा, किसी ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना (ट्रांसक्रिप्शन), कांपते हुए वीडियो को स्थिर करना (स्टेबलाइजेशन) या कलर बैलेंस ठीक करना भी इस नियम से बाहर रखा गया है. सरकार मानती है कि ये तकनीकी सुधार हैं, न कि किसी को धोखा देने की कोशिश.
शिक्षा और प्रेजेंटेशन का क्या होगा?
मंत्रालय ने छात्रों और प्रोफेशनल लोगों को बड़ी राहत दी है. पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी सामग्री, ट्रेनिंग वीडियो, रिसर्च रिपोर्ट और ऑफिस की प्रेजेंटेशन बनाने में अगर AI की मदद ली गई है, तो उन्हें लेबल करने की जरूरत नहीं है. शर्त बस इतनी है कि इस प्रक्रिया में कोई झूठा रिकॉर्ड या जाली दस्तावेज तैयार न किया गया हो. अगर कोई AI से जाली सर्टिफिकेट या आईडी कार्ड बनाता है, तो वह गैरकानूनी माना जाएगा.
भाषा और एक्सेसिबिलिटी पर राहत
वीडियो में सबटाइटल डालना या किसी भाषण का दूसरी भाषा में अनुवाद करना भी इस नियम की बंदिशों से मुक्त है. सरकार का कहना है कि अगर AI का इस्तेमाल कंटेंट को बेहतर ढंग से समझने या विकलांग लोगों की मदद के लिए किया जा रहा है (जैसे नेत्रहीनों के लिए ऑडियो डिस्क्रिप्शन), तो उसे लेबल करने की जरूरत नहीं है.
सख्त नियम और तीन घंटे का समय
ये नए नियम इसलिए लाए गए हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर अश्लील, भ्रामक और डीपफेक कंटेंट तेजी से बढ़ रहा है. अब प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट की पहचान करने के लिए उसमें स्थायी ‘मेटाडेटा’ या पहचान चिन्ह डालना होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि अब शिकायत मिलने पर गैरकानूनी कंटेंट हटाने की समय सीमा को बहुत छोटा कर दिया गया है, ताकि नुकसान कम से कम हो.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.