बाजार जानकारों का कहना है कि तीन वजहों से भारतीय शेयर बाजार में एफपीआई का निवेश बढ़ा है, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और भारतीय बाजार में सस्ते शेयर शामिल हैं. इसके अलावा, तीसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई 14.7 प्रतिशत बढ़ी है, जिससे एफपीआई का भरोसा बढ़ा है.
एफपीआई ने फरवरी में भारतीय इक्विटी में शुद्ध निवेश किया.
सेक्टर के हिसाब से एफपीआई ने फरवरी, 2026 में फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स सेक्टर में जमकर खरीदारी की, जबकि आईटी सेक्टर में निवेश कम किया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी परेशानियों की वजह से इस सेक्टर से 10,956 करोड़ रुपये निकाले गए. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि एंथ्रोपिक के असर और सेक्टर में कमजोरी की वजह से एफपीआई ने आईटी शेयरों में भारी बिकवाली की, लेकिन फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स सेक्टर में खरीदार रहे.
बिकवाल से बने खरीदार
एफपीआई नंवबर 2025 से ही बिकवाल बने हुए थे. नवंबर में विदेशी निवेशकों ने 3,765 करोड़ रुपये की निकासी की थी. दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और जनवरी, 2026 में 35,962 करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजार से निकाले. साल 2025 में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे. वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर ने कहा कि यह निवेश सेकेंडरी मार्केट में खरीदारी से बढ़ा है, जो 2025 की निकासी के बाद विदेशी निवेशकों के नए भरोसे को दिखाता है.
एंजल वन लिमिटेड के सीनियर एनालिस्ट जावेद खान ने कहा कि तीन वजहों से एफपीआई का निवेश बढ़ा है, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और भारतीय बाजार में सस्ते शेयर शामिल हैं. इसके अलावा, तीसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई 14.7 प्रतिशत बढ़ी है, जिससे एफपीआई का भरोसा बढ़ा है.
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