Gold Price : सोने में तूफानी तेजी जारी है और यह कीमती धातू रोज नए रिकॉर्ड बना रही है. सोने की इस जबरदस्त तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य है. राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘टैरिफ वॉर’ की धमकियों और घरेलू आर्थिक नीतियों में बड़े बदलावों के संकेतों ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है.
कीमती धातुओं की इस दौड़ में सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी ने भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है. बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) खतरों और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के कारण चांदी की मांग बेतहाशा बढ़ी है. पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ने पहली बार $100 प्रति औंस का ऐतिहासिक स्तर पार किया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर के बाजार में सोने की कीमत जहां $5,035.25 पर देखी गई, वहीं चांदी 2.2% की बढ़त के साथ $105.50 पर पहुंच गई. डॉलर इंडेक्स में आई भारी गिरावट ने इन धातुओं को अन्य देशों के खरीदारों के लिए और अधिक आकर्षक (Affordable) बना दिया है.
क्यों चढ रहा है सोना
सोने की इस जबरदस्त तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य है. राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘टैरिफ वॉर’ की धमकियों और घरेलू आर्थिक नीतियों में बड़े बदलावों के संकेतों ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है. निवेशक अब सरकारी सोवरेन बॉन्ड्स और करेंसी मार्केट से अपना पैसा निकालकर सोने में लगा रहे हैं. स्थिति यह है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो चुकी हैं.
डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड्स में गिरावट का असर
आम तौर पर जब अमेरिकी ट्रेजरी और डॉलर जैसे एसेट्स मजबूत होते हैं, तो सोने की चमक फीकी पड़ती है. लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके उलट है. अमेरिकी गवर्नमेंट बॉन्ड और ट्रेजरीज जैसे डॉलर आधारित एसेट्स में भारी गिरावट देखी जा रही है. केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी अस्थिरता का माहौल है, जिसके चलते पिछले हफ्ते जापान के लॉन्ग और अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड्स में भारी बिकवाली हुई. जब फिक्स्ड इनकम वाले इन एसेट्स से निवेशकों का भरोसा उठता है, तो वे गोल्ड की ओर रुख करते हैं, जिसे ‘सेफ हेवन’ माना जाता है.
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