Bangladesh Crisis : बांग्लादेश जिस उद्योग के ऊपर गर्व कर रहा था, वह भारत के धागे में उलझकर दम तोड़ रहा है. अभी तक 50 से ज्यादा मिलों पर ताले लग चुके हैं और कपड़ा उत्पादकों ने 1 फरवरी से पूरी तरह उत्पादन ठप करने की चेतावनी दी है.
बांग्लादेश का सबसे बड़ा उद्योग कपड़ा है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. जारा और एचएनएम जैसे ब्रांड भी बांग्लादेश से बनकर जाते हैं, तब दुनिया पहनती है. बांग्लादेश अकेले हर साल करीब 47 अरब डॉलर के रेडीमेड कपड़े दुनिया को निर्यात करता है. इन कपड़ों को बनाने के लिए बांग्लादेश यार्न यानी धागे का आयात भारत से करता है. मतलब सीधा कारोबार, भारत से सस्ते धागे खरीदो, उससे कपड़े बनाओ और दुनिया को बेच दो. लेकिन, बांग्लादेश को इन सस्ते धागों की ऐसी लत पड़ी कि आज उसी धागे में उलझकर उसका अरबों डॉलर का कारोबार डूबने की कगार पर पहुंच गया है. आलम ये है कि उसके मिल मालिकों ने सरकार से साफ कहा है कि अगर कुछ नहीं किया तो 1 फरवरी से सारी कपड़ा मिलें बंद हो जाएंगी.
कैसे फंस गया बांग्लादेश
बांग्लादेश में धागे का लोकल उत्पादन उतना नहीं होता, जितना उसके कपड़ा उद्योग को जरूरत है. लिहाजा वह भारत और चीन से सस्ते धागे का आयात करता है. भारत का धागा अच्छी क्वालिटी और सस्ता होने के नाते ज्यादा खरीदता है. उसे प्रति किलोग्राम 3 से 5 फीसदी सस्ता भी पड़ता है. साल 2025 में उसने 70 करोड़ किलोग्राम धागा आयात किया, जिसमें से 78 फीसदी यानी करीब 2 अरब डॉलर के धागे सिर्फ भारत से मंगाए गए हैं. इस आयात की बड़ी वजह यह है कि वहां बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत धागा आयात करने पर खरीदारों को कोई आयात शुल्क नहीं देना पड़ता है.
इसी धागे में उलझ गईं मिलें
भारत से सस्ते धागे का आयात इतना ज्यादा हुआ कि बांग्लादेश की लोकल मिलों के पास करीब 10 हजार करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया, जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है. इस स्टॉक की वजह से देश में 50 से ज्यादा मिलें बंद हो चुकी हैं और उत्पादन की क्षमता भी 50 फीसदी कम हो गई है. इस संकट की वजह से अब तक हजारों नौकरियां जा चुकी हैं. बांग्लादेश में पिछले 4-5 महीने से गैस संकट भी चल रहा है, जिससे कर्ज और लोन चुकाने का संकट बढ़ गया. बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि अगर भारत से धागे की डंपिंग बंद नहीं हुई तो 1 फरवरी, 2026 से उत्पादन ठप कर देंगे.
जाल बन गया सस्ता धागा
एक तरफ तो बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातक सस्ते धागे के आयात के पक्ष में हैं, क्योंकि लोकल धागा महंगा और क्वालिटी में भी अच्छा नहीं होता. अगर आयात बंद हुआ तो लागत बढ़ेगी और उत्पादन में देरी आएगी जिससे ऑर्डर्स में कमी आ सकती है. अगर सरकार के कदम से आयात रुकता है तो उत्पादकों को ऊंची कीमतों पर लोकल धागा खरीदना पड़ेगा. इससे उनकी प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा. छोटी और मझोली आकार वाली फैक्ट्रियां पहले 10-20 टन धागे का ऑर्डर 2 दिन में डिलीवर करा लेती थीं, लेकिन अब इसमें देरी होगी और उत्पादन अटकेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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