Gold Price : सोने की चमक इन दिनों पूरी दुनिया को चकाचौंध कर रही है और कीमतों ने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है. घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव 1,53,000 रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है. दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से सोने की कीमतों में 70 फीसदी से ज्यादा की तूफानी तेजी दर्ज की गई है.
स्पॉट गोल्ड की कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े के ऊपर निकल गई हैं. बाजार में जबरदस्त लिवाली के चलते एक समय यह 4,717.03 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके अब तक के सबसे उच्चतम स्तर के बेहद करीब है. अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 2.8 प्रतिशत का जोरदार उछाल देखा गया, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का सीधा प्रमाण है.

अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतों को भारतीय परिपेक्ष्य में देखें तो एक औंस सोने की कीमत लगभग 4,32,004 रुपये बैठती है. ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में जो हलचल मची है, उसने सोने की मांग को रातों-रात बढ़ा दिया है. अनिश्चितता के इस दौर में दुनिया भर के बड़े निवेशक अब सुरक्षित निवेश के लिए सोने को ही अपनी पहली पसंद बना रहे हैं.

सोने के साथ-साथ चांदी ने भी इस रेस में खुद को सबसे आगे रखा है और ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इसमें 200 प्रतिशत की अद्भुत बढ़त देखी गई है. चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 94.72 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुंचीं, जिससे निवेशकों को मोटा मुनाफा हुआ है. रुपये में गणना करें तो स्पॉट सिल्वर अब 8,630 रुपये प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जो एक नया कीर्तिमान है.
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इस बेतहाशा तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक व्यापारिक नीतियां और यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकियां हैं. जब भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में खटास आती है, तो वैश्विक बाजार की भावनाएं कमजोर पड़ने लगती हैं और निवेशक सतर्क हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में शेयर बाजार के बजाय कीमती धातुओं को सबसे सुरक्षित आश्रय (Safe Haven) माना जाता है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ती हैं.

केसीएम ट्रेड के मुख्य विश्लेषक टिम वॉटरर का मानना है कि ट्रंप की गैर-परंपरागत राजनीतिक शैली कीमती धातुओं के लिए किसी बड़े वरदान की तरह साबित हुई है. कम ब्याज दरें और व्यापारिक प्रतिबंधों का डर एक ऐसा अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जहां सोना और चांदी तेज रफ्तार से ऊपर जा रहे हैं. जब तक वैश्विक राजनीति में स्थिरता नहीं आती, तब तक इन धातुओं की ऊंची उड़ान रुकने के संकेत नहीं मिल रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से भी सोने की कीमतों को जबरदस्त तकनीकी समर्थन मिला है. यूरोपीय संघ द्वारा टैरिफ-मुक्त कदमों की घोषणा की संभावना से अमेरिकी परिसंपत्तियों की बिक्री बढ़ सकती है, जिससे डॉलर पर दबाव और बढ़ेगा. जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना खरीदना सस्ता और आकर्षक हो जाता है, जिससे इसकी वैश्विक मांग में इजाफा होता है.

टैरिफ युद्ध की आशंका ने अमेरिकी शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड्स में भी भारी बिकवाली का माहौल बना दिया है, जिससे डॉलर एक हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है. 2025 जैसी आर्थिक अस्थिरता के लौटने के डर से अब निवेशक स्विस फ्रैंक और सोने जैसे विकल्पों की ओर भाग रहे हैं. बाजार का मानना है कि यदि साल के मध्य तक कोई ठोस व्यापार समझौता नहीं होता, तो यह अस्थिरता और भी भयानक रूप ले सकती है.

पेपरस्टोन के रिसर्च स्ट्रैटेजिस्ट अहमद असिरी के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय बातचीत का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं होता, कीमती धातुओं में तेजी का यह रुख बना रहेगा. आने वाले समय में सोने का आउटलुक और भी ज्यादा बुलिश नजर आता है, खासकर अगर अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार युद्ध गहराता है. ऐसे में छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशक अब सोने को अपने पोर्टफोलियो का सबसे जरूरी हिस्सा मान रहे हैं.

सोने-चांदी के अलावा अन्य कीमती धातुओं जैसे प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी तेजी का रुख साफ दिखाई दे रहा है. स्पॉट प्लैटिनम अब 2,387.55 डॉलर प्रति औंस (करीब 2,18,661 रुपये) के भाव पर पहुंच गया है, जबकि पैलेडियम में भी हल्की बढ़त देखी गई है. कीमती धातुओं के पूरे बास्केट में आ रही यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था में फैली गहरी अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के डर को साफ तौर पर बयां करती है.

भारत में भी सोने की मजबूत सांस्कृतिक और निवेश मांग के कारण घरेलू बाजार में कीमतों का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर भाग रहा है. ट्रंप की नीतियों का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने भारतीय निवेशकों के लिए भी सोने को एक महंगा लेकिन सुरक्षित सौदा बना दिया है. भविष्य में सोने की दिशा इस बात पर टिकी होगी कि वैश्विक व्यापार वार्ताएं और भू-राजनीतिक समीकरण आने वाले महीनों में किस करवट बैठते हैं.
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