सोना-चांदी की रेस में आया बड़ा मोड़
2025 में चांदी ने रिकॉर्डतोड़ तेजी दिखाई थी और करीब 170 फीसदी तक उछल गई थी. शुरुआती 2026 में भी इसमें जोरदार हलचल रही, लेकिन अब वही तेजी कमजोर होती दिख रही है. दूसरी ओर, 2026 में अब तक सोना करीब 15 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि चांदी की तेजी 10 फीसदी तक सीमित रही है. बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशकों का मिजाज तेजी से बदल रहा है.
उपयोगिता नहीं, मनोविज्ञान बना बाजार का ड्राइवर
चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल उपकरण, पानी शुद्धिकरण और उद्योगों में होता है, जबकि सोने की व्यावहारिक उपयोगिता सीमित मानी जाती है. इसके बावजूद अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सोने को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं. यह साफ दिखाता है कि बाजार में कई बार उपयोगिता से ज्यादा निवेशकों की सोच और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति अहम हो जाती है.
चांदी की तेज चाल बनी परेशानी
विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है. रोजाना बड़े दायरे में होने वाली हलचल ने कई निवेशकों को सतर्क कर दिया है. इसी कारण अब चांदी में निवेश को लेकर ज्यादा चयनात्मक और अनुशासित नजरिया अपनाने की सलाह दी जा रही है. इसके मुकाबले सोना अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, जिससे उसका आकर्षण बढ़ा है.
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर निवेशकों के लिए सोना बेहतर विकल्प बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमतों में स्थिरता रहती है. वहीं चांदी उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जो तेज उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता रखते हैं. उनका मानना है कि चांदी में अच्छी खबरों का असर काफी हद तक पहले ही दिख चुका है, जबकि सोने में अभी भी आगे बढ़ने की गुंजाइश है.
चीन और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
सोने की मजबूती के पीछे केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद भी एक बड़ा कारण है. चीन का केंद्रीय बैंक लगातार कई महीनों से सोना खरीद रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आधिकारिक स्तर पर सोने की मांग बनी हुई है. विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्रीय बैंकों की यह रणनीति लंबे समय तक सोने को सपोर्ट देती रहेगी.
ETF और अनुपात दे रहे अहम संकेत
निवेशक प्रवाह भी बदलते रुझान की ओर इशारा कर रहा है. 2026 की शुरुआत से अब तक सिल्वर ETF से बड़ी मात्रा में निवेश बाहर निकला है, जबकि गोल्ड ETF में निवेश अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है. इसके अलावा गोल्ड-सिल्वर अनुपात भी काफी नीचे आ चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि चांदी की बढ़त का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है.
तकनीकी स्तर क्या कह रहे हैं
तकनीकी रूप से चांदी अभी दबाव में दिख रही है और प्रमुख स्तरों से नीचे कारोबार कर रही है. हालांकि लंबी अवधि की कहानी अब भी मजबूत मानी जा रही है. वहीं सोना हालिया गिरावट के बाद मजबूत सपोर्ट जोन में टिका हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सुधार के बाद सोना एक बार फिर नई तेजी की तैयारी कर सकता है.
भू-राजनीति और मैक्रो फैक्टर का असर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान वार्ता, ब्याज दरों में कटौती की संभावनाएं और वास्तविक ब्याज दरों का नकारात्मक रहना भी सोने को मजबूती दे रहा है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंकों का विविधीकरण रुझान भी सोने की मांग को बढ़ा रहा है. कुल मिलाकर, 2026 में कीमती धातुओं का खेल बदल चुका है, जहां तेज रफ्तार से ज्यादा सुरक्षित चाल को प्राथमिकता दी जा रही है.
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