एनएसई ने कहा है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर हालिया एसटीटी बढ़ोतरी से खासकर फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और सरकार से इसे रिव्यू करने की उम्मीद है. एक्सचेंज का मानना है कि फ्यूचर्स इंस्ट्रूमेंट्स लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए हेजिंग का अहम टूल हैं, जबकि बढ़ी हुई ट्रांजेक्शन कॉस्ट से मार्केट पार्टिसिपेशन प्रभावित हो सकता है.
एनएसई मैनेजमेंट ने इन्वेस्टर कॉल में बताया कि बजट से पहले बाजार को उम्मीद थी कि कैश मार्केट पर एसटीटी में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन इसके उलट फ्यूचर्स और ऑप्शंस दोनों पर टैक्स बढ़ा दिया गया. इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट बढ़ गया है और हेजिंग करना महंगा हो सकता है.
सरकार से बातचीत
एक्सचेंज ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर कई रिप्रेजेंटेशंस दी जा रही हैं और उम्मीद है कि टैक्स स्ट्रक्चर पर कोई रिव्यू या रेशनलाइजेशन किया जाएगा. एनएसई ने यह भी कहा कि पिछले मामलों में टैक्स बढ़ोतरी के बावजूद ट्रेडिंग वॉल्यूम में कोई लंबी गिरावट नहीं आई है, क्योंकि बाजार ने अतिरिक्त कॉस्ट को एब्जॉर्ब कर लिया था.
कैलेंडर स्प्रेड रिलीफ पर चर्चा
एनएसई ने कैलेंडर स्प्रेड मार्जिन रिलीफ हटाने के प्रस्ताव पर भी बात की और कहा कि इस पर ब्रोकर एसोसिएशंस और रेगुलेटर के बीच चर्चा चल रही है, जबकि अंतिम फैसला सेबी (SEBI) लेगा और रिटेल निवेशकों की सुरक्षा प्राथमिकता होगी. साथ ही सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग फ्रेमवर्क में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया और कहा गया कि अगर यह सिस्टम आसान होता है तो कैश मार्केट में लिक्विडिटी और डेप्थ बढ़ सकती है.
क्या चाहता है ब्रोकर संघ
ब्रोकर बॉडी एएनएमआई (ANMI) ने भी सरकार से एसटीटी बढ़ोतरी पर रिव्यू की मांग की है और कहा है कि फ्यूचर्स पर ट्रांजेक्शन कॉस्ट लगभग दोगुना हो गया है, जबकि ऑप्शंस पर सीमित बढ़ोतरी हुई है. इससे लिक्विडिटी और मार्केट पार्टिसिपेशन पर असर पड़ सकता है और भारतीय बाजार पहले से ही ग्लोबल मार्केट्स के मुकाबले महंगा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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