स्वास्थ्य बीमा लेते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह समझना है कि प्री-एक्जिस्टिंग डिजीज (PED) का मतलब बीमा की मनाही नहीं है. इसके बजाय, यह केवल कुछ शर्तों और वेटिंग पीरियड के साथ आता है. सही पॉलिसी का चुनाव करके और कंपनी के साथ पारदर्शिता बरतकर, आप एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार कर सकते हैं जो आपातकालीन स्थिति में आपके और आपके परिवार के वित्तीय बोझ को कम कर सके.
पुरानी बीमारी के साथ बीमा पाने के स्मार्ट तरीके
1. फुल डिस्क्लोजर है जरूरी
बीमा लेते समय अपनी हर छोटी-बड़ी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में कंपनी को साफ-साफ बताएं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, जानकारी छिपाना क्लेम रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण है. भले ही आपको थोड़ा अतिरिक्त प्रीमियम (Loading) देना पड़े, लेकिन सच बताने से आपका क्लेम मिलने की गारंटी बढ़ जाती है.
2. वेटिंग पीरियड का गणित
ज्यादातर पॉलिसियों में पुरानी बीमारियों के लिए 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड होता है. हालांकि, अब कंपनियां ऐसे ‘राइडर्स’ पेश कर रही हैं जिन्हें खरीदकर आप इस वेटिंग पीरियड को कम कर सकते हैं. कुछ प्रीमियम प्लान्स में तो यह पीरियड महज एक साल या उससे भी कम हो सकता है.
3. को-पेमेंट और डिजीज-स्पेसिफिक प्लान्स
यदि आपकी बीमारी गंभीर है, तो कंपनियां ‘को-पेमेंट’ का विकल्प दे सकती हैं, जहाँ बिल का एक छोटा हिस्सा आपको देना होगा. इसके अलावा, खास तौर पर डायबिटीज या दिल के मरीजों के लिए बनाए गए स्पेशल प्लान्स लेना ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि उनमें वेटिंग पीरियड कम और कवर ज्यादा मिलता है.
4. मोरेटोरियम पीरियड की सुरक्षा
नियमों के मुताबिक, यदि आपकी पॉलिसी को 8 साल पूरे हो गए हैं, तो कंपनी पहले से मौजूद बीमारी का आधार बनाकर आपका क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती. यह ग्राहकों के लिए एक बड़ी कानूनी सुरक्षा है.
5. मेडिकल टेस्ट की अहमियत
पॉलिसी लेने से पहले यदि कंपनी मेडिकल टेस्ट का सुझाव देती है, तो उसे जरूर करवाएं. टेस्ट के बाद जारी की गई पॉलिसी में भविष्य में किसी भी तरह के विवाद की संभावना न्यूनतम हो जाती है.
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