लेकिन इस घटना में एक अहम बात यह सामने आई है कि जहाज पर उस समय कोई माल नहीं लदा हुआ था. इसलिए अब चर्चा इस बात की ज्यादा हो रही है कि जहाज तो तबाह हो चुका है, लेकिन उसके मालिक को बीमा से कितनी रकम मिल सकती है.
मालिक को बीमा मिलेगा क्या?
कंपनी ने बताया है कि इस जहाज का वॉर रिस्क इंश्योरेंस (War Risk Insurance) कराया गया था. यह एक खास तरह का बीमा होता है जो युद्ध, मिसाइल हमले, ड्रोन अटैक या आतंकी हमलों से होने वाले नुकसान को कवर करता है.
हालांकि बीमा की असली रकम सार्वजनिक नहीं की गई है. लेकिन शिपिंग इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, 2008 में बना यह जहाज आज के समय में लगभग 8 से 15 मिलियन डॉलर यानी करीब 73 से 138 करोड़ रुपये के बीच कीमत का हो सकता है. अगर जांच के बाद जहाज को पूरी तरह नष्ट यानी घोषित कर दिया जाता है, तो टोटल लॉस के लिए कंपनी को पूरी कीमत मिल सकती है, जितना कि बीमा में थी. लेकिन अगर जहाज की मरम्मत संभव हुई, तो बीमा कंपनी सिर्फ मरम्मत का खर्च देगी.
मयूरी नारी का बीमा किसने किया?
अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि मयूरी नारी का बीमा किस कंपनी ने किया था. प्रेशियस शिपिंग ने सिर्फ इतना बताया है कि जहाज वॉर रिस्क इंश्योरेंस से कवर था, लेकिन बीमा कंपनी का नाम नहीं बताया गया.
आमतौर पर थाई शिपिंग कंपनियां यह बीमा लॉयड्स ऑफ लंदन (Lloyd’s of London) या नॉर्डिक मार्केट से करवाती हैं. वॉर रिस्क इंश्योरेंस अक्सर लंदन मार्केट या नॉर्डिक देशों के बीमा नेटवर्क से मिलता है. जब भी कोई जहाज ऐसे इलाके में प्रवेश करता है जिसे हाई-रिस्क एरिया माना जाता है, तो जहाज के मालिक को अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ता है. इसे एडिशनल प्रीमियम कहा जाता है.
दुनिया में कितनी कंपनियां देती हैं यह बीमा?
वॉर रिस्क इंश्योरेंस देने वाली कंपनियां दुनिया में बहुत ज्यादा नहीं हैं. इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ियों में वेसल प्रोटेक्ट (Vessel Protect) का नाम प्रमुख है. इसके अलावा हाल के वर्षों में कई नई विशेषज्ञ कंपनियां भी बनी हैं, जैसे नावियम मरीन (Navium Marine Ltd.), एआई मरीन रिस्क (Ai Marine Risk Ltd.), क्लियरवॉटर यूडब्ल्यू (Clearwater UW Ltd.) और के2 रुबिकॉन स्पेशियलिटी (K2 Rubicon Specialty).
बीमा ब्रोकिंग कंपनी मार्श एंड मैकलेनन के अनुमान, लंदन में वॉर रिस्क इंश्योरेंस का बाजार लगभग 620 मिलियन डॉलर का है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह बाजार करीब 1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
इसके अलावा दुनिया में करीब 20 पीएंडआई क्लब (Protection and Indemnity Clubs) भी हैं. ये ऐसे संगठन होते हैं, जहां कई शिप्स के मालिक मिलकर एक-दूसरे के जोखिम को साझा करते हैं. इनमें से ज्यादातर क्लब ब्रिटेन में स्थित हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना संवेदनशील क्यों?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों के बाद इस इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है. इसका असर सीधे शिपिंग पर पड़ रहा है. कई जहाज अब इस रास्ते से जाने से बच रहे हैं और बीमा कंपनियां भी ज्यादा प्रीमियम ले रही हैं.
बताया जा रहा है कि करीब 72 दिनों बाद यह इस इलाके में जहाज पर पहला बड़ा हमला है. अब तक इस टकराव में 7 से ज्यादा जहाजों को नुकसान पहुंच चुका है और शिपिंग इंडस्ट्री को लगभग 1.75 अरब डॉलर तक का नुकसान होने का अनुमान है.
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