कार्यक्रम की शुरुआत में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं. भविष्य की पीढ़ियों के लिए नई नींव तैयार हो रही है. उन्होंने बताया कि 2047 में भी भारत एक युवा देश ही रहेगा. अगर 1947 से ही यही भावना और मेहनत बनी रहती तो भारत की ग्रोथ कितनी कंपाउंड होती, हम कल्पना कर सकते हैं. कम से कम 2014 से ही सही शुरू हो गई है. उन्होंने कुछ लोगों पर तंज कसा कि जब चिप की बात होती है तो उन्हें पोटेटो चिप याद आती है. संसद में रोते-धोते रहते हैं लेकिन कभी कहीं और नहीं जाते. यह तंज उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस और राहुल गांधी पर किया था. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सामने उन्होंने यह बात कही. इस बीच सबसे अहम बात ये निकलकर आई है कि आखिर पैक्स सिलिका भारत के लिए क्यों बहुत खास माना जा रहा है.
क्यों देश के लिए बेहद खास है ‘पैक्स सिलिका’?
1.पैक्स सिलिका में भारत के शामिल होने से सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और चिप डिजाइन को सपोर्ट मिलेगा. भारत में पूरी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बन रही है. इसके लिए दस प्लांट्स पहले से स्थापित हैं और आगे भी इनपर काम किया जा रहा है.
2. जल्द ही भारत अपना पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेगा. आज भारत में सबसे एडवांस्ड दो नैनोमीटर चिप्स डिजाइन हो रही हैं. पैक्स सिलिका से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा. दुनिया भारत पर भरोसा करती है. भारत में बड़ा टैलेंट पूल है और विदेश नीति से ट्रस्ट बनाया है. युवाओं को इससे बहुत फायदा मिलेगा.
3. पैक्स सिलिका में अब भारत दसवां सदस्य बन गया है. पहले से ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, जापान, साउथ कोरिया जैसे देश हैं. इसका मकसद सिलिकॉन, क्रिटिकल मिनरल्स, एआई और एनर्जी की सप्लाई चेन को चीन पर निर्भरता से मुक्त करना है.
4. भारत को हाई क्वालिटी चिप मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन विविधीकरण और टेक्निकल निवेश के नए मौके मिलेंगे. वैश्विक टेक्नोलॉजी मानकों में भारत की भूमिका मजबूत होगी. भारत-अमेरिका के बीच सेमीकंडक्टर, एआई और डिफेंस सेक्टर में संबंध बेहतर होगा.
5. टेक्नोलॉजी में भारत के लीडर बनने की राह आसान होगी. पैक्स सिलिका से भविष्य सुरक्षित और मजबूत बनेगा. इससे एआई सप्लाई चेन में डाइवर्सिटी आएगी. 6जी, डेटा सेंटर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रोजेक्ट्स होंगे.
6.अमेरिका के साथ सहयोग गहरा होगा. सेमीकंडक्टर, एआई, रक्षा और ट्रेड में नई डील्स होंगी. अमेरिकी कंपनियां भारत में ज्यादा निवेश करेंगी, जैसे गूगल और दूसरी टेक कंपनियां पहले से कर रही हैं.
7. इससे युवाओं को नए अवसर मिलेंगे. पैक्स सिलिका से स्किल डेवलपमेंट, जॉब्स और इनोवेशन में बढ़ोतरी होगी. 2047 तक भारत विकसित देश बनने की राह पर यह मददगार साबित होगा.
8.महत्वपूर्ण खनिजों का सुरक्षित एक्सेस मिलेगा. लिथियम, कोबाल्ट जैसे मिनरल्स बैटरी और एआई हार्डवेयर के लिए जरूरी हैं. पैक्स सिलिका से भारत को इनकी सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मिलेगी और चीन पर निर्भरता घटेगी.
9. इससे सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा, प्रोस्पेरिटी और इनोवेशन की नई व्यवस्था है. भारत अब ट्रस्टेड पार्टनर्स के साथ मिलकर भविष्य बनाने पर फोकस करेगा.
10. भारत की इंडो-पैसिफिक में स्ट्रैटेजिक पोजिशन मजबूत होगी. चीन के दबदबे को कम करने के लिए है भारत पैक्स सिलिका में शामिल होकर अपनी जगह पक्की करेगा.
‘पैक्स सिलिका’ में भारत के शामिल होने पर सर्जियो गोर ने क्या कहा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत पैक्स सिलिका में शामिल हुआ है. यह सामरिक कदम है. शांति ताकत से आती है और भारत इसे समझता है. संप्रभुता दरअसल पैक्स सिलिका का मूल उद्देश्य है. हम भारत के साथ विश्वसनीय तकनीक साझा कर सकते हैं. पैक्स सिलिका में भारत का स्वागत करते हैं. भारत की रिजॉल्व और डिटर्मिनेशन कमाल की है. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील, पैक्स सिलिका, डिफेंस सहयोग से अनलिमिटेड पोटेंशियल है. उन्होंने कहा कि इस एंट्री से हम जीत चुन रहे हैं.
गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत और अमेरिका को इस महत्वपूर्ण पल के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिकी साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. पैक्स सिलिका समझौते पर उन्होंने जोर दिया कि यह एआई और सेमीकंडक्टर के लिए बड़ा कदम है.
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