रिपोर्ट में प्रमुखता से बताया गया है कि 19.6 प्रतिशत का यह अनुपात हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की तुलना में कहीं अधिक है. हालांकि, केंद्र सरकार का व्यक्तिगत कर राजस्व जीडीपी के 11.7 प्रतिशत पर है, लेकिन राज्यों के मजबूत योगदान ने समग्र आंकड़े को काफी बेहतर बना दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा देश के वित्तीय स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की सरकार की क्षमता को मजबूत करेगा.
क्या है इसका मतलब?
यह अनुपात यह बताता है कि किसी देश की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) के मुकाबले वहां की सरकार टैक्स के रूप में कितना पैसा इकट्ठा कर रही है.
अगर किसी देश की जीडीपी ₹100 है और सरकार को कुल ₹20 टैक्स मिल रहा है, तो वहां का टैक्स-टू-जीडीपी रेश्यो 20% होगा.
इसमें दो तरह के टैक्स शामिल होते हैं
- प्रत्यक्ष कर (Direct Tax): जैसे आपकी इनकम पर लगने वाला इनकम टैक्स या कंपनियों के मुनाफे पर लगने वाला कॉर्पोरेट टैक्स.
- अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax): जैसे सामान और सेवाओं पर लगने वाला GST, एक्साइज ड्यूटी या कस्टम ड्यूटी.
विकसित देशों से तुलना और भविष्य की संभावना
भले ही भारत ने कई उभरते देशों को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन विकसित देशों के मुकाबले हम अभी भी पीछे हैं:
- जर्मनी: 38 प्रतिशत
- अमेरिका: 25.6 प्रतिशत
बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा अवसर है. भारत की युवा आबादी और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय आने वाले समय में कर आधार को और अधिक विस्तारित करने में मदद करेगी.
आयकर अधिनियम 2025: एक बड़ा गेम-चेंजर
रिपोर्ट में ‘आयकर अधिनियम 2025’ (Income Tax Act 2025) का विशेष उल्लेख किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाला है. इस नए कानून के जरिए:
1. कर प्रणाली का सरलीकरण: पुराने और जटिल नियमों को हटाकर भाषा को आसान बनाया गया है.
2. टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट: ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ के भ्रम को खत्म कर एक ‘टैक्स ईयर’ सिस्टम लाया जाएगा.
3. पारदर्शिता: डिजिटलीकरण और कॉर्पोरेट कर संरचना के सरलीकरण से कर अनुपालन (Compliance) आसान होगा.
उम्मीद है कि इस कानून से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मुख्य कर प्रणाली में जुड़ जाएगा.
कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आय में बढ़त
ऐतिहासिक विश्लेषण से पता चलता है कि नॉमिनल जीडीपी और कर संग्रह के बीच तालमेल बढ़ रहा है. कंपनियों के बेहतर मुनाफे ने कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह को मजबूती दी है, जबकि बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और सख्त डिजिटल निगरानी ने व्यक्तिगत आयकर संग्रह को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है. सरकार का ध्यान अब करों के युक्तिकरण और सरलीकरण पर है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत का कर-जीडीपी अनुपात और भी बढ़ सकता है.
(एजेंसी के इनपुट के साथ)
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