ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध ने दुनिया के तेल बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर दी है. सप्लाई पर खतरे के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और कई देशों में पेट्रोल डीजल महंगा हो गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण रोज करीब 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है. इसी वजह से ब्रेंट कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है.
मौजूदा तनाव के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही पर खतरा पैदा हो गया है, जिससे रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित होने का अंदेशा है. इस संकट का असर सीधे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया है. वैश्विक मानक Brent Crude की कीमत बढ़कर करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. हाल ही में यह करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था.
किस देश में कहां पहुंची पेट्रोल डीजल की कीमत
तेल संकट का असर दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है. पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 321 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 335 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. सिर्फ एक हफ्ते में कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक उछाल आया है. संयुक्त राज्य अमेरिका में औसतन गैसोलीन की कीमत करीब 4.5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. हाल के दिनों में इसमें 30 से 40 सेंट तक की बढ़ोतरी हुई है. यूके में पेट्रोल करीब 1.50 पाउंड प्रति लीटर के आसपास है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 160 रुपये प्रति लीटर बैठता है. जर्मनी में पेट्रोल की कीमत लगभग 1.80 यूरो प्रति लीटर तक पहुंच गई है. बांग्लादेश में पेट्रोल करीब 130 टका प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है. वहीं श्री लंका में पेट्रोल करीब 450 श्रीलंकाई रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इसके अलावा तुर्किये, मिस्र और नाइजीरिया जैसे कई देशों में भी ईंधन की कीमतों में 20 से 50 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिला है.
भारत पर कितना असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 85 से 88 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है. मौजूदा संकट का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है. कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अगर ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है तो कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी हो सकती है. तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल डीजल तक सीमित नहीं रहेगा. इससे परिवहन, खाद्य पदार्थ, बिजली और विनिर्माण जैसे कई क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर खतरा
ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने इस स्थिति को क्षेत्र का सबसे बड़ा संकट बताया है. उनका कहना है कि अगर सप्लाई में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. हालांकि, सऊदी अरब ने अपने कुछ निर्यात को लाल सागर के यनबू बंदरगाह के जरिए भेजने की योजना बनाई है, लेकिन अगर संकट लंबा चलता है तो दुनिया के लिए तेल संकट और गहरा हो सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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